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बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो।” इस पंक्ति की काव्यगत विशेषताओं का परिचय कराइए। |
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Answer» इस पंक्ति में कवि ने एक सर्वथा नए घरेलू बिम्ब द्वारा उषाकालीन आकाश का वर्णन किया है। सामान्य घरों में आज भी मसाला चटनी आदि पीसने के लिए सिल का प्रयोग होता है। पीसने के पश्चात् सिल को धो दिया जाता है। किन्तु प्रतिः के आकाश के गहरे नीले रंग में उसकी लालिमा छिटकी हुई है। कवि ने आकाश को काली सिल और लालिमा को लाल केसर मिश्रित जल माना है। जिससे सिल को धोया गया है। इसके अतिरिक्त भाषा की सरलता और लाक्षणिकता तथा उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग भी इस पंक्ति की विशेषता है। |
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