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भूमध्यसागरीय प्रदेशों से उदाहरण देते हुए समझाइए कि वनस्पति अपनी जलवायु से किस प्रकार समानुकूलन करती है?

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भूमध्यसागरीय प्रदेशों में शरद ऋतु में वर्षा होती है, जबकि ग्रीष्मकाल शुष्क रहता है। अतः यहाँ इस प्रकार की वनस्पति उगती है जो शरद ऋतु में एकत्र की गई नमी पर निर्भर रह सके। यहाँ उगने वाले वृक्षों की पत्तियाँ चिकनी, छोटी तथा मोटी होती हैं तथा कुछ पत्तियों पर मोम जैसा चिकना एवं दूध जैसा पदार्थ निकलकर चिपक जाता है। पत्तियों की इसी विशेषता के कारण इन वृक्षों से वाष्पीकरण की क्रिया द्वारा नमी नष्ट नहीं होती है। वृक्षों की छालें लम्बी एवं मोटी होती हैं। अतः यहाँ कम ऊँचाई की चौड़ी पत्ती वाली सदाहरित वनस्पति उगती है।
इस जलवायु प्रदेश में ओक, चीड़, अंजीर, अखरोट, जैतून, नारंगी एवं शहतूत आदि के वृक्ष प्रमुख रूप से उगते हैं। इस प्रकार यहाँ ऐसे वृक्ष उगते हैं जो सरलता से ग्रीष्मकाल की शुष्कता को सहन करने में । सक्षम होते हैं तथा उन्होंने अपनी जलवायु से पूर्ण रूप से समायोजन कर लिया है। तूरस एवं रसदार फलों के लिए यह प्रदेश विश्वविख्यात है।



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