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भूपों के प्रासाद किस पर निछावर हैं तथा क्यों?

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राजाओं के महलों की सुख-सुविधा कवि को आकर्षित नहीं करती। वह तो अपनी झोपड़ी (खण्डहर) से ही संतुष्ट है। आत्म-संतोष के कारण राजमहलों को वह खण्डहर पर निछावर करता है। कवि के विचार धन के पीछे भागने वाले जगत से नहीं मिलते। उसका त्याग, प्रेम और मस्ती भरे जीवन में ही विश्वास है। इसी कारण उसे महलों की सुख-सुविधाएँ तुच्छ प्रतीत होती हैं।



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