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बिहारी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए

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लाल की भक्ति भावना” हिंदी साहित्य में रीति काल के कवियों में बिहारी का नाम महत्वपूर्ण है। बिहारीलाल मुख्य रूप से श्रृंगारी कवि हैं। उनकी भक्ति भावना राधा कृष्ण के प्रति है। सतसई के आरंभ में मंगलाचरण का यह दोहा राधा के प्रति उनके भक्तिभाव का ही परिचायक है। "मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय"बिहारी लाल ने भक्ति भावना के माध्यम से प्रकृति चित्रण का भी बहुत सुंदर वर्णन किया है । जिसमें में से उन्होंने सभी ऋतु ओं का उल्लेख किया है। वे राधा कृष्ण के भक्त हैं तथा उनके प्रति उनके मन में बड़ी आदर और श्रद्धा है। उन्हें विश्वास है कि भगवान श्री कृष्ण की शरण में जो आता है उन सब का कल्याण हो जाता है।



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