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‘बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही’-कथन की युक्तियुक्त विवेचना कीजिए।

Answer»

उपर्युक्त पंक्ति में लेखक की लोकानुभूति छिपी है। घोड़े को घुमाना और संध्या को धूल में लिटाना बहुत आवश्यक है। अगर घोड़े को घुमायें नहीं तो वह अड़ियल हो जाता है और फिर आसानी से ताँगे में चलता नहीं है। यदि उसे संध्या में धूल में लिटाएँ नहीं तो उसकी दिनभर की थकान दूर नहँ होती । इसलिए उसे फिरोना आवश्यक है। इसी प्रकार सिपाही में लड़ने के समय जोश आता है। यदि उसे युद्ध के मैदान में लड़ने का अवसर न मिले तो वह सुस्त और आलसी हो जाता है, उसका जोश समाप्त हो जाता है। लड़ने की बात सुनकर उसका खून उबलने लगता है। इसलिए सिपाही का लड़ना आवश्यक है।



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