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बंदा सिंह बहादुर की शहीदी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

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गुरदास नंगल के युद्ध में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके सभी साथियों को बन्दी बना लिया गया था। उन्हें पहले लाहौर और फिर दिल्ली ले जाया गया। दिल्ली के बाजारों में उनका जुलूस निकाला गया और उनका अपमान किया गया। बाद में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके 740 साथियों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने को कहा गया। उनके इन्कार करने पर बंदा सिंह बहादुर के सभी साथियों की हत्या कर दी गई। अन्त में 19 जून, 1716 ई० में मुग़ल सरकार ने बंदा सिंह बहादुर के वध का भी फरमान जारी कर दिया। उनके वध से पहले उन पर अनेक अत्याचार किए गए। उनकी आंखों के सामने उनके शिशु पुत्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। लोहे की गर्म सलाखों से बंदा सिंह बहादुर का मांस नोचा गया। इस प्रकार बंदा सिंह बहादुर शहीदी को प्राप्त हुआ।



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