1.

बसंत मेरे गाँव का बदलते त्योहार बदलते मौसम

Answer»

हमारे त्योहार और मौसम के बीच घना संबंध है। वेदों में प्रकृति को ईश्वर का साक्षात् रूप मानकर उसके हर रूप की वंदना की गई है। इसके अलावा आसमान के तारों और आकाश मंडल की स्तुति कर उनसे रोग और शोक को मिटाने की प्रार्थना की गई है।

ऋतुएँ छह बताई गई हैं – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमंत एवं शिशिर । ऋषियों ने ऐसे प्रत्येक ऋतु में प्रत्येक त्योहार और नियम बनाए जिनका पालन करने से व्यक्ति सुखमय जीवन प्यतीत कर सके। वसंत ऋतु में होली, रंग-पंचमी, बसंत पंचमी, नवरात्रि, रामनवमि, हनुमान जयंती और गुरुपूर्णिमा उत्सव मनाए जाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में निर्जला एकादशी वट सावित्री व्रत, शीतलाष्टमी, देवशयनी, एकादशी, और गुरुपूर्णिमा त्योहार आते हैं। श्रावण और भाद्रपद वर्षा ऋतु के मास हैं। वर्षा नया जीवन लेकर आती है।

यह माह जुलाई-सितंबर में पडता है। इस ऋतु के तीज, रक्षाबंधन और कृष्णजन्माष्टमी सबसे बड़े त्योहार हैं। शरद् ऋतु वातावरण में स्वाच्छता का प्रसार दिखाई पड़ता है। यह ऋतु अकतूबर से नवंबर के बीच रहती है। इस ऋतु के त्योहार हैं – श्राध्द पक्ष, नवरात्रि, दशहरा करवा चौथ । हेमंत ऋतु हिंदु माह के मार्गशीर्ष और पौष मास के बीच रहती है। इस ऋतु में शरीर प्रायः स्वस्थ रहता है। करवा चौथ, धनतेरस, रूप चतुर्दशी दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज आदि त्योहार पडेंगे। शिशिर ऋतु माघ और फाल्गुन के महीने अर्थात् पतझड़ माह में आती है।

इस ऋतु में प्रकृति पर बुढ़ापा छा जाता है। इस ऋतु से ऋतुचक्र के पूर्ण होने का संकेत मिलता है। यह 15 जनवरी से पूरे फरवरी माह तक रहती है। इस ऋतु में मकर संक्रांति का त्योहार आता है। इसी ऋतु में फाल्गुन मास कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है।



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions