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बुद्ध को अपनी बातें लोगों को समझाने में क्या कठिनाइयां हुई होगी |
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Answer» अपनी-अपनी विचारधारा के मुताबिक गौतम बुद्ध को एक राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह पेश करने वाले लोगों को उनका जीवन और दर्शन फिर से समझने की जरूरत हैआज वैशाख महीने की पूर्णिमा है. मान्यता है कि आज ही के दिन मां महामाया के गर्भ से शाक्यमुनि राजकुमार गौतम का जन्म हुआ था. यह भी संयोग माना जाता है कि इसके ठीक 35 वर्ष बाद इसी तिथि को उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और इस तरह बुद्ध के रूप में उनका दूसरा जन्म हुआ. और एक और संयोग ऐसा कि 80 वर्ष की अवस्था में इसी तिथि को उन्होंने शरीर भी त्यागा. इस तरह भारतीय परंपरा में यह दिन पूरी तरह से बुद्ध को समर्पित हो गया. इसे बुद्ध पूर्णिमा ही कहा जाने लगा.यह भी एक संयोग है कि बुद्धत्व प्राप्ति से पहले गौतम के समस्त चिंतन के केन्द्र में भी जन्म और मृत्यु का यही रहस्य जान लेने की उत्कंठा थी. दुख के इस कुचक्र से छूट निकलने की बेचैनी थी. हालांकि भारत की अति-प्राचीन ज्ञान परंपरा में जन्म और मृत्यु पर पहले से ही अथाह चिंतन होता चला आ रहा था. लेकिन बुद्ध ने उस चिंतन को अपनी आत्म-साधना और आत्मानुभूति की कसौटी पर कसने की कोशिश की. किसी भी विचार को सत्य मानने से पहले उसे इस कसौटी पर कसने की परंपरा यहां पहले से भी थी. तैत्तिरीय उपनिषद् का ऋषि अपने शिष्यों से कह चुका था - ‘यान्यनवद्यानि कर्माणि. तानि सेवितव्यानि. नो इतराणि. यान्यस्माकं सुचरितानि. तानि त्वयोपास्यानि...’ यानी हमने जो तुम्हें शिक्षा दी उसे ही पूरी तरह अनुकरणीय सत्य नहीं मान लेना. उसे अपने विवेक की कसौटी पर कसना. फिर तय करना कि यह अनुकरणीय है या नहीं. |
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