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चालू पेढ़ी का ख्याल उदाहरण सहित समझाओ ।

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चालू पेढ़ी का ख्याल आधारित अमुक उदाहरण निम्न अनुसार है :

(i) अग्रीम चुकाया खर्च आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है कारण कि धंधा लंबे समय तक चलनेवाला है और यह माना जाता है कि अग्रीम चुकाये खर्च का लाभ भविष्य में प्राप्त होगा ।

(ii) हिसाबी अवधि के अंत में वित्तीय पत्रक तैयार किये जाते है । चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार व्यवसाय खूब लंबे समय तक चलनेवाला है, ऐसी परिस्थिति में इतने लंबे समय तक व्यवसाय से जुड़े पक्षकार धंधे के परिणाम की राह नहीं देखेंगे । ऐसा मानकर नियत समय के अंतर पर धंधे के लाभ-हानि या संपत्ति-दायित्व की जानकारी प्राप्त होती रहे इसके लिये नियमित हिसाब लिख्खे जाते है ।

(iii) प्रसारित राजस्व खर्च कितनी बार आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति लेना पक्ष में बताये जाते है । कारण कि यह माना जाता है कि पेढ़ी लंबे समय तक चलनेवाली है और व्यवसाय को उस खर्च का लाभ लंबे समय तक प्राप्त होता रहेगा ।

(iv) स्थिर संपत्तियाँ आर्थिक चिट्ठे में घिसाई घटाने के बाद की किंमत से बताई जाती है । स्थिर संपत्तियाँ पुनः विक्रय के लिये नहीं परंतु लंबे समय तक उपयोग के लिये खरीदी जाती है, इसलिये चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार आर्थिक चिट्टे में उसकी बाजार किंमत दर्शाने के बदले उसकी घिसाई घटाने के बाद की किंमत दर्शायी जाती है ।

(v) अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसके लिये हुए लागत के आधार पर किया जाता है । किसी भी समय व्यवसाय में अर्धतैयार माल पर
प्रक्रिया की जा सकती है । अगर व्यवसाय बंद हो जाये तब ऐसे अर्धतैयार माल की खूब ही कम किंमत प्राप्त होगी इस लिये इन परिस्थितियों में ऐसे स्टोक की प्राप्त होनेवाली किंमत ही गिननी चाहिए ।

परंतु चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार हम यह मानते है कि उत्पादन की प्रक्रिया माल पूर्ण हो जाये तब तक चलेगी जिससे तैयार माल अस्तित्व में आयेगा । इसलिये ऐसे अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसकी प्राप्त होनेवाली किंमत के बदले उसके पीछे किये गये खर्च या लागत के आधार पर किया जाता है ।



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