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चमड़ी को नर्म रखने के लिए यह लीजिए – महँगी है, पर आपके सौंदर्य में निखार ला देगी । संभ्रांत महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हज़ार की सौंदर्य सामग्री होना तो मामूली बात है । पेरिस से परफ्यूम मँगाइए, इतना ही और खर्च हो जाएगा । ये प्रतिष्ठा-चिह्न हैं, समाज में आपकी हैसियत जताते हैं । पुरुष भी इस दौड़ में पीछे नहीं है ।। पहले उनका काम साबुन और तेल से चल जाता था । आफ्टर शेव और कोलोन बाद में आए । अब तो इस सूची में । दर्जन दो दर्जन चीजें और जुड़ गई हैं ।1. साबुन के विज्ञापन में गंगाजल शब्द को क्यों जोड़ा गया है ?2. सामाजिक प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए संभ्रांत महिलाएँ क्या करती हैं ?3. पहले पुरुषों का काम किससे चल जाता था ?4. ‘गंगाजल’ का सामासिक विग्रह करते हुए उसके प्रकार बताइए ।

Answer»

1. गंगाजल हमारी धार्मिक आस्था और पवित्रता का प्रतीक है । शरीर को पवित्र रखने के लिए साबुन के साथ गंगाजल को जोड़ । दिया गया है, ताकि इसमें आस्था रखनेवाले लोग उस साबुन को खरीदें ।

2. सामाजिक प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए संभ्रांत महिलाएँ अपनी ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हजार की सौन्दर्य सामग्री रखती हैं, विदेश से महँगी परफ्यूम मंगाती हैं ।

3. पहले के समय में पुरुषों का काम साबुन और तेल से चल जाता था ।

4. गंगाजल → गंगा का जल, तत्पुरुष समास ।



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