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चर्चा कीजिए : वैज्ञानिक खोज – वरदान या शाप

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(चार मित्र शाम को बगीचे में बैठे हुए)
अनूप – वाह, क्या मस्त ठंडी हवा है। प्रकृति ने ग्रीष्म ऋतु में गर्मी दी है तो ऐसी ठंडी हवा भी दी है।

मंजुल- अरे, यह बगीचा चारों तरफ खुला है, इसलिए अच्छा लगता है। फिर, ठंडी हवा भी रोज और हरदम नहीं चलती। घर में ए.सी. न हो तो मैं रात में सो ही नहीं सकता। सचमुच ए.सी. के रूप में विज्ञान हमारे लिए वरदान है।

संजय – अरे ए.सी. ही क्यों, विज्ञान ने ही हमें बिजली की रोशनी दी है। बिजली से ही पंखे चलते हैं, फ्रीज में चीजें सुरक्षित रहती हैं। ठंडी में नहाने के लिए गर्म पानी करनेवाला गीजर भी बिजली से ही चलता है। लिफ्ट भी बिजली से ही चलती है।

मंजुल – सिनेमा, टीवी, टेलीफोन, मोबाइल, कम्प्यूटर, लेपटोप आदि भी विज्ञान की अद्भुत खोजें हैं।

गौरव – अरे विज्ञान के गुण गानेवालों, यह क्यों भूल जाते हो कि ये बम, मिसाइलें, तरह-तरह के ड्रग्स भी विज्ञान के ही आविष्कार हैं। बम-विस्फोटों से जान-माल की जो भयंकर हानि हो रही है, वह विज्ञान का शाप नहीं तो और क्या है?

अनूप – हाँ, इसमें कोई शक नहीं कि विज्ञान ने मानव के विनाश के साधनों का भी आविष्कार किया है। इस अर्थ में वह अवश्य शाप है, परंतु उसने तरह-तरह की सुविधाएँ भी दी हैं। विनाश के साथ उसने हमें विकास के साधन भी दिए हैं।

मंजुल-देखो भाई, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। अच्छाइयों के साथ बुराइयाँ सब में होती हैं। फूलों के राजा गुलाब में भी काँटे होते हैं।

संजय – इसका मतलब यही है कि विज्ञान यदि वरदान है, तो शाप भी है। परंतु उसके वरदान इतने हैं कि उसके शापों पर जल्दी ध्यान ही नहीं जाता।

मंजुल- कुछ भी हो आज के मनुष्य के लिए तो विज्ञान वरदान ही है।



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