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डायरी के रूप में लिखिए :अपने जीवन का कोई सुखद अनुभव।

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सुरत।

17 नवंबर, 2013

आज का दिन तो सचमुच अविस्मरणीय रहा। दीवाली के मेले में जाने के लिए माँ ने बीस रुपए दिए थे। अब इस छोटी-सी रकम में क्या मेले का आनंद लिया जा सकता है? इसमें पाँच रुपए तो बस के किराये के लिए ही थे।

मैं मेले में जाने के लिए निकल ही रहा था कि मेरे मामाजी आ गए। वे बोले, “मेला देखे तो मुझे भी बरसों हो गए। चलो, मैं भी आज मेले का आनंद ले लूँ।”

मैं मामाजी की बाइक पर सवार हुआ और फट-फट करती हुई उनकी बाइक सड़क पर हवा से बातें करने लगी। मेले में हमने खूब आनंद लिया। समोसे खाए, लस्सी पी, गुलाबजामुन का स्वाद लिया। फोटो खिंचवाए, निशानेबाजी में इनाम जीता और चरखी पर बैठे।

हाथी की सवारी का भी आनंद लिया। इतना सब आनंद लेने के बावजूद मेरे बीस रुपये जैसे के तैसे जेब में पड़े रहे। मेले में घूमने का वह सुखद अनुभव शायद ही कभी भूल पाऊँ। इसका श्रेय मामाजी को है।



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