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DEFINE:क. बहुलकख. थर्मोप्लास्टिकग. आघातवर्घनीयताघ, अमलीय आक्साइडइ. वायूमईलीय दाबच, स्थिरवैधुत बल. द्रव घर्षण​

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बहुलक - दी गयी संख्याओं में बहुलक एक ऐसी विशेष प्रकार की संख्या होती है जो सबसे ज़्यादा बार दोहराती है। हम ऐसा भी कह सकते हैं की बहुलक एक ऐसी वैल्यू है जो अवलोकनों के समूह में सबसे ज़्यादा बार दोहराई जाती है। इसे हम सबसे ज़्यादा आवृति वाली संख्या कह सकते हैं।

थर्मोप्लास्टिक - थर्मोप्लास्टिक ऐसा प्लास्टिक पॉलिमर होता है जो तापमान बढ़ने पर अधिक कोमल और गिरने पर अधिक ठोस होता जाए। अधिकांश थर्मोप्लास्टिकों का अणु भार ऊँचा होता है और उनके पॉलिमर अणुओं में आपसी अंतराअणुक बल द्वारा जुड़ने वाली शृंख्लाओं से बनते हैं और तापमान बढ़ने से कमज़ोर होता जाता है जिस से प्लास्टिक की कोमलता बढ़ती है।

आघातवर्घनीयता - किसी पदार्थ को दबाने पर विकृत होकर दाब के लम्बवत दिशा में फैलने का गुण आघातवर्धनीयता कहलाता है। आघातवर्धनीय पदार्थों को हथौड़े से पीटकर या बेलकर आसानी से चपटा किया जा सकता है। धातुएँ प्रायः आघातवर्धनीय हैं। सोना, लोहा, अलुमिनियम, ताँबा, पीतल, चाँदी, सीसा आदि आघातवर्धनीय हैं।

अमलीय आक्साइड - एसिडिक ऑक्साइड , या एसिड एनहाइड्राइड, ऑक्साइड होते हैं जो एक एसिड बनाने के लिए पानी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, या नमक बनाने के लिए आधार के साथ। वे उच्च ऑक्सीकरण राज्यों में या तो nonmetals या धातुओं के ऑक्साइड हैं। ऑक्साइड छोड़कर, जब तक ऑक्साइड छोड़ा जाता है, तब तक उनकी रसायन शास्त्र को ऑक्सीएडिड लेने और पानी को हटाकर व्यवस्थित रूप से समझा जा सकता है। परिणामी ऑक्साइड पदार्थों के इस समूह से संबंधित है।

वायुमंडलीय दाब - वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी के वायुमंडल में किसी सतह की एक इकाई पर उससे ऊपर की हवा के वजन द्वारा लगाया गया बल है। अधिकांश परिस्थितियों में वायुमंडलीय दबाव का लगभग सही अनुमान मापन बिंदु पर उसके ऊपर वाली हवा के वजन द्वारा लगाया जाता है।

स्थिरवैधुत बल - में स्थिर विद्युत के अन्तर्गत आवेश की स्थिर (गतिहीन) अवस्था में होने वाले प्रभावों एवं घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। स्थिर विद्युत से अभिप्राय किसी वस्तु की सतह पर निर्मित हुये विद्युत आवेश से है। यह स्थिर आवेश उस वस्तु पर तब तक उपस्थित रहते है जब तक कि यह भूमि में ना बह जायें या फिर यह निरावेशण (DISCHARGE) द्वारा अनाविष्ट (NEUTRALIZE) ना हो जाये। जब भी दो सतह एक दूसरे के संपर्क में आती हैं या पृथक होती है तो आवेश का अंतरण होता है, लेकिन यदि दोनो सतहों में से एक में विद्युत प्रवाह के प्रति उच्च प्रतिरोध (विद्युत विसंवाहक) हो तो स्थिर आवेश यथावत रहता है। हम में से अधिकतर लोग स्थिर विद्युत के प्रभावों से परिचित हैं क्योंकि हम इसे अनुभव कर सकते हैं, जब किसी आवेशित वस्तु को किसी विद्युत चालक (जैसे भूमि से जुड़ा हुआ चालक) या फिर विपरीत ध्रुवता के उच्चावेशित क्षेत्र के निकट लाया जाता है तो हम उस चिंगारी को देख और सुन सकते हैं जो अतिरिक्त आवेश के अनाविष्ट होने के कारण उत्पन्न होती है। एक स्थिर विद्युत का झटका इसी आवेश अनाविष्टि का परिणाम होता है।

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