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देश में ‘हरित क्रान्ति’ पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

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हरित क्रान्ति से अभिप्राय उस कृषि क्रांति से है जिसका आरम्भ कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किया गया। हरित क्रान्ति की मुख्य विशेषता यह है कि इससे कृषि का मशीनीकरण हो जाता है और उत्पादन में बहुत वृद्धि होती है। जुताई, बुवाई तथा गहाई के लिए मशीनों का प्रयोग होता है। उर्वरकों तथा अच्छी नस्ल के बीजों का प्रयोग भी होता है जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। भारतीय कृषि के विकास के लिए जहां अन्य विधियां अपनायी गयीं वहां अच्छे बीजों और यन्त्रों का भी प्रयोग किया गया। 1961 में इस काम के लिए देश के सात जिलों को चुना गया। पंजाब का लुधियाना ज़िला इन सात जिलों में से एक था। लुधियाना के साथ-साथ सारे पंजाब पर हरित क्रान्ति का प्रभाव पड़ा और पंजाब एक बार फिर भारत की ‘अनाज की टोकरी’ बन गया। प्रभाव-भारतीय समाज पर हरित क्रान्ति के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव निम्नलिखित हैं —
1. आर्थिक प्रभाव —

  1. हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है।
  2. कृषि निर्वाह अवस्था से निकलकर व्यापारिक अवस्था में बदल गई है।
  3. कृषि का मशीनीकरण हो गया है।
  4. हरित-क्रान्ति के परिणामस्वरूप सिंचाई का क्षेत्र काफ़ी बढ़ गया है।
  5. किसानों ने आर्थिक दृष्टि से अधिक-से-अधिक लाभकारी फसल-चक्र अपना लिया है।

2. सामाजिक प्रभाव—

  1. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के परिणामस्वरूप लोगों के जीवन स्तर में प्रगति हुई है। किसान अब पहले से अच्छे और पक्के मकानों में रहते हैं। उनके पास निजी वाहन हैं।
  2. हरित-क्रान्ति के परिणामस्वरूप किसानों में साक्षरता बढ़ रही है, गांव-गांव में जहां स्कूल खुल रहे हैं वहां अस्पतालों की भी व्यवस्था की जा रही है।


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