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. देश में लगी पाबंदियों से प्रकृति में परिवर्तन होने पर पिता और पुत्री के मध्य हुए संवाद का लेखन कीजिये । |
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Answer» यह रहा आपका जवाब-Explanation:पुत्री-'पिता जी! मैं घर में पड़ी-पड़ी तंग हो गयी हूँ, अब मैं अपनी सहेली सरिता के घर जाना चाहती हूँ ।'पिता-'अच्छा, ठीक है चली जाना पर पहले मेरी बात तो सुन लो, कहीं तुम्हारे इरादे न बदल जाए ।'पुत्री-'जी पिता जी, आप बताइये।'पिता-'पुत्री, तुम खिड़की से झाँको और फिर मुझे बताना की तुम्हे क्या क्या बदलाव नज़र आया।'(पिता के कहने पर पुत्री ने कुछ देर खिड़की से झाँक कर देखा और बोली)पुत्री-'हाँ, बदलाव तो है, न कोई अपने घरों से बाहर निकल रहा है, न कहीं गाडिय़ों की शोर, है तो सिर्फ ठंडी वायु और हरे भरे वृक्ष।'पिता-'देखा, कोई अपने घरों से बाहर इसलिए नहीं निकल रहा क्योंकी इस पे पाबंदी है, और देखो इसी की वजह से प्रकृति में बदलाव भी आया है जैसे पेड़ वापस से हरे भरे हो गये, वरना पहले तो धूल से ढँक जाते थे।'पुत्री-'हाँ पिता जी, और चिड़ियों की मीठी मीठी चहचहाट भी सुनाइ देती है, और यही नहीं बल्कि आकाश अब मुझे नीला दिखाई देता है।'पिता-'हाँ, तो ये सब बातें जनते हुए तुम बाहर जाकर और लोग को बाहर बुलाकर प्रदूषण करना चाहती हो?'पुत्री-'जी नहीं पिता जी, मैं अभी फिलहाल घर में ठीक हूँ ।'पिता-'हाँ,हा,हा,हा।' आशा है कि यह मददगार साबित हो । |
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