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देश प्रेम की रो में बहकर एक सूत्र में मिलकर रहकर| |
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Answer» देश वासियों गर्व करो। कैसे आजादी थी पायी? इस पर भी कुछ मनन करो । अगणित वीरों की कुर्बानी, से आजादी आयी है। सस्ते में ना मिली आजादी। कीमत बड़ी चुकाई है। तोड़ दिया शासक ने हमको। बांट दिया दो भागों में। भाई की भाई से दुश्मनी, करवाई चालाकों ने। बांट दिया टुकड़ों में देश को। फूट डाल कर राज किया। घर के गद्दारों संग मिल कर। जाति धर्म को बांट दिया नफरत की विष बेल बो गये। जुल्म का नंगा नाच किया आजादी के दीवानों ने। देश पे जान लुटायी है। सस्ते में ना मिली आजादी, कीमत बड़ी चुकाई है। आज तिरंगे के नीचे। हर भार वासी एक है। हो जाति, धर्म या भाषा कोई। राष्ट्र हमारा एक है। |
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