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देवेन्द्र ने परीक्षा होने के बावजूद भी भिखारी की मदद क्यों की?

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भिखारी के पाँव में गहरी चोट लगी थी। उसमें से खून बह रहा था। उसे अस्पताल पहुँचाना जरूरी था। देवेन्द्र के लिए मानव की सेवा सबसे पहला कर्तव्य था। इन्सान की सेवा ही उसकी दृष्टि में सबसे बड़ा धर्म था। इसलिए परीक्षा होने के बावजूद उसने भिखारी की मदद की।



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