1.

धन्धा तथा समाज दोनों एकदूसरे के अभिन्न अंग है । किस तरह ?

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कोई भी धन्धाकीय प्रवृत्ति, अन्त में समाज में ही जन्म लेती है, आकार प्राप्त करती है, वृद्धि करती है तथा उसका अन्त भी . समाज में ही होता है । धन्धाकीय प्रवृत्ति को समाज से अलग करके नहीं देखा जा सकता । धन्धा तथा समाज दोनों एकदूसरे के अभिन्न अंग हैं ।



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