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दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।मैं यह नहीं मानता की समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भाग करते हुए जीवन बिता रहा हूं लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंतत: हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपके अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे।(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) लेखक किनको एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता?(iv) डॉ० कलाम संवृद्धि की कद्र क्यों करते हैं?(v) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने छात्रों को क्या संदेश दिया है?

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(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित ‘डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम’ के तेजस्वी मन से “हम और हमारा आदर्श” का सम्पादित अंश है।।
अथवा
पाठ का नाम-
 हम और हमारा आदर्श।
लेखक का नाम-डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से अब्दुल कलाम जी समृद्धि की कद्र करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति को कामयाब होने के लिए वह सभी हरसम्भव प्रयास करने चाहिए जो वह कर सकता है। किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए अर्थात् काम करते हुए उससे ऊबकर उसे बीच में नहीं छोड़ देना चाहिए। इसके लिए प्रकृति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए वे कहते हैं कि यदि आप अपने आस-पास देखें तो आपको ऐसे प्रकृति के बहुत-से उदाहरण मिल जाएँगे जो कि पूर्ण होते दिखेंगे यानी प्रकृति अपने किसी भी काम को अधूरे मन से नहीं करती। आप किसी फूलों के बाग में ही पहुँच जाइए; वहाँ मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी, क्योंकि मौसम ने अपने काम को अधूरा नहीं छोड़ा। या फिर आप अपने ऊपर की ओर ही देखें तो आपको यह ब्रह्माण्ड इस तरह विस्तृत दिखाई देगा जिसका कोई अन्त नहीं है, जहाँ तक आप सोच भी नहीं सकते अर्थात् यह नभ भी हमें विस्तृत होने का यानी पूर्णता का सन्देश देता है।

(iii) लेखक संवृद्धि और अध्यात्म को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता।

(iv) डॉ० कलाम सम्वृद्धि की कद्र इसलिए करते हैं, क्योकि संवृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अन्तत: हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है।

(v) प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक ने छात्रों को प्रगति करने के लिए किसी भी कार्य को पूर्ण करके ही चैन लेने का सन्देश दिया है।



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