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दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएतू देखेगी जलद-तन को जा वहीं तद्गता हो ।होंगे लोने नयन उनके ज्योति-उत्कीर्णकारी ।।मुद्रा होगी वर बदन की मूर्ति-सी सौम्यता की ।सीधे साधे वचन उनके सिक्त होंगे सुधा से ।।नीले फूले कमल दल-सी गात की श्यामता है।पीला प्यारा वसन कटि में पैन्हते हैं फबीला ।।छूटी काली अलके मुख की कान्ति को है बढ़ाती ।सद्वस्त्रों में नवल तन की फूटती-सी प्रभा है ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को किसकी पहचान बताती हैं?(iv) श्रीकृष्ण के नेत्रों की शोभा कैसी है?(v) श्रीकृष्ण कटि में कैसा वस्त्र धारण करते हैं?

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(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धत है।
अथवा
शीर्षक नाम- 
पवन-दूतिका।।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-राधा कहती हैं कि हे पवन! वहाँ जाकर तू मेघ के समान शोभा वाले श्रीकृष्ण को देखेगी। उनके शरीर की श्यामलता खिले हुए नीलकमल के समान मोहक है। मेरे प्रियतम कृष्ण कटि में आकर्षक पीला वस्त्र धारण करते हैं। उनके मुख पर लटकी हुई काले बालों की लट उनकी शोभा को चार चाँद लगा रही होगी। उनके सुन्दर वस्त्रों से उनके मनोहर शरीर की शोभा अत्यधिक बढ़ रही होगी।

(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को श्रीकृष्ण की पहचान बताती हैं।

(iv) श्रीकृष्ण के सुन्दर नेत्र प्रकाश बिखेरते हैं।

(v) श्रीकृष्ण कटि में पीला वस्त्र धारण करते हैं।



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