| 1. |
दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएबैठी खिन्ना यक दिवस वे गेह में थीं अकेली ।आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते ।।आई धीरे इस सदन में पुष्प-सद्गंध को ले ।प्रात: वाली सुपवन इसी काल वातायनों से ।।संतापों को विपुल बढ़ता देख के दु:खिता हो ।धीरे बोली स-दुःख उससे श्रीमति राधिका यों ।।प्यारी प्रात: पवन इतना क्यों मुझे है सताती ।क्या तू भी है कलुषित हुई काल की क्रूरता से ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) घर में दुःखी होकर एक दिन अकेले कौन बैठा था?(iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर में किसने प्रवेश किया?(v) राधा ने प्रातःकालीन वायु से दुःखित होकर क्या कहा? |
|
Answer» (i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।। (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या–प्रात:कालीन सुखद वायु पुष्यों की सुगंध लेकर धीरे से खिड़कियों के रास्ते उस घर में प्रविष्ट हुई। जो राधा घर में बहुत दु:खी होकर अकेली बैठी थीं। वायु संयोग में सुखद लगती थी, वही अब वियोग में दु:ख बढ़ाने वाली सिद्ध हुई. अत: उस वायु के कारण अपनी व्यथा को और बढ़ता देखकर राधा बहुत दु:खित होकर उससे बोली कि हे प्यारी प्रभातकालीन वायु! तू मुझे इतना क्यों सता रही है? क्या तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गयी है अर्थात् समय या भाग्य तो मेरे विपरीत है ही, पर क्या तू भी उससे प्रभावित होकर मेरा दु:ख बढ़ाने पर तुली है, जब कि सामान्यत: तू लोगों को सुख देने वाली मानी जाती है?’ (iii) एक दिन राधा घर में दु:खी होकर अकेली बैठी हुई थीं। (iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर प्रात:कालीन सुखद वायु ने प्रवेश किया। (v) राधा ने प्रात:कालीन वायु से दुःखित होकर कहा कि हे प्रभातकालीन वायु! तू मुझे क्यों सताती है? का तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गई है। |
|