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दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएलज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आये ।होने देना विकृत-वसना तो न तू सुन्दरी को ।।जो थोड़ी भी श्रमित वह हो गोद ले श्रान्ति खोना ।होंठों की औ कमल-मुख की म्लानतायें मिटाना ।।कोई क्लान्ता कृषक-ललना खेत में जो दिखावे ।धीरे-धीरे परस उसकी क्लान्तियों को मिटाना ।।जाता कोई जलद यदि हो व्योम में तो उसे ला।छाया द्वारा सुखित करना, तप्त भूतांगना को ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ कैसा व्यवहार करने को कहती हैं?(iv) राधा ने पवन-दूतिका को पथिक कृषक-स्त्री के ऊपर किसके द्वारा छाया करने को कहा(v) ‘कृषक ललना’ शब्द में कौन-सा समास होगा?

Answer»

(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।
अथवा
शीर्षक नाम-
 पवन-दूतिका।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-हे पवन ! यदि तुझे मार्ग में कोई लाजवन्ती स्त्री दिखाई पड़े तो इतने वेग से न बहना कि उसके वस्त्र उड़कर अस्त-व्यस्त हो जाएँ और उसका शरीर उघड़ जाए। यदि वह थोड़ी-सी भी थकी दिखाई दे तो उसे गोद में लेकर अर्थात् उसे चारों ओर से घेरकर उसकी थकान मिटा देना, जिससे कि (थकान के कारण) उसके सूखे होंठ और मुरझाया हुआ कमल-सदृश मुख प्रफुल्लित हो उठे।

(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ परोपकार का व्यवहार करने को कहती हैं।

(iv) राधा ने पवन-दूतिका को थकित कृषक-स्त्री के ऊपर मेघ द्वारा छाया करने को कहा है।

(v) ‘कृषक-ललना’ शब्द में ‘तत्पुरुष समास’ होगा।



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