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‘दीवानों का वेश लिए फिरने’ से कवि का आशय क्या है? |
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Answer» कवि अपने मन की पीड़ा जताकर किसी की सहानुभूति या दया पाना नहीं चाहता। अत: वह अपने हाव-भाव, व्यवहार और कविता में मस्ती और दीवानगी लिए जी रहा है। |
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