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दोहे का भावार्थ लिखें:आवत ही हर्षे नहीं, नैनन नहीं सनेह।तुलसी तहाँ न जाइए, कञ्चन बरसे मेह ॥८॥

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि किसी के घर जाने पर वह प्रसन्न नहीं होता और उसके नेत्रों में स्नेह नहीं झलकता, तो उसके घर में कभी नहीं जाना चाहिए, भले ही वहाँ सोने की वर्षा क्यों न होती हो। अर्थात् कोई व्यक्ति कितना ही बड़ा अमीर क्यों न हो, उसके घर जाने पर अतिथि सत्कार नहीं होता हो, तो वहाँ नहीं जाना चाहिए।



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