1.

दोहे का भावार्थ लिखें:जग ते रह छत्तीस है, राम चरन छ: तीन।तुलसी देखु विचार हिय, है यह मतौ प्रबीन ॥२॥

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तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य को इस संसार से अर्थात् सांसारिक प्रपंच से छत्तीस (३६) जैसा सम्बन्ध रखना चाहिए और परमात्मा के साथ तिरसठ (६३) का सम्बन्ध रखना चाहिए। इसका अभिप्राय यह है कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को संसार के प्रति उदासीनता दिखानी चाहिए और परमात्मा के प्रति हमेशा प्रेम प्रकट करना चाहिए।



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