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दोहे का भावार्थ लिखें:काम, क्रोध, मद, लोभकी, जौ लौं मन में खान।तौं लौ पंडित मूरखौ, तुलसी एक समान ॥७॥

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि जब तक मनुष्य के मन में काम (वासना), क्रोध, घमंड, लोभ आदि विकार उत्पन्न होते रहते हैं, तब तक वह विद्वान होते हुए भी मूर्ख के समान है। इसलिए मनुष्य को काम, क्रोध, मद तथा लोभ का शीघ्र ही त्याग कर देना चाहिए।



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