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दूसरे दिन हम घोड़ों पर सवार होकर ऊपर की ओर चले । डाँडे से पहिले एक जगह चाय पी और दोपहर के यक्त डॉडे के ऊपर जा पहुँचे । हम समुद्रतल से 17-18 हजार फीट ऊँचे खड़े थे । हमारी दक्खिन तरफ़ पूरब से पश्चिम की ओर हिमालय के हजारों श्वेत शिखर चले गए थे । भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ बिलकुल नंगे थे, न वहाँ बरफ़ की सफ़ेदी थी, न किसी तरह की हरियाली । उत्तर की तरफ़ बहुत कम बरफ़ वाली चोटियाँ दिखाई पड़ती थीं । सर्वोच्च स्थान पर डाँडे के देवता का स्थान था, जो पत्थरों के ढेर, जानवरों की सींगों और रंग-बिरंगे कपड़े की झंड़ियों से सजाया गया था । अब हमें बराबर उतराई पर चलना था ।1. भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ कैसे थे ?2. डाँडे के देवता को किन चीजों से सजाया गया था ?3. ‘हिमालय’ तथा ‘सर्वोच्च’ शब्द का संधि-विग्रह कीजिए । |
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Answer» 1. भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ बिलकुल नंगे थे । न वहाँ बरफ की सफेदी थी न किसी तरह की हरियाली । 2. डाँडे के देवता को पत्थरों के ढेर, जानवरों की सींगों और रंगबिरंगे कपड़ों की झंड़ियों से सजाया गया था । 3. हिमालय – हिम + आलय |
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