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द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पश्चिमी यूरोप को एकताबद्ध करने के प्रयासों के आर्थिक और राजनीतिक प्रयासों की विवेचना कीजिए।

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पश्चिमी यूरोप का आर्थिक पुनरुद्धार और एकीकरण-द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पश्चिमी यूरोप को एकताबद्ध करने के आर्थिक-राजनीतिक प्रयास निम्नलिखित रहे-

⦁    शीतयुद्ध-सन् 1945 के बाद यूरोप के देशों में मेल-मिलाप की शीतयुद्ध से भी मदद मिली। शीतयुद्ध के दौर में पूर्वी यूरोप तथा पश्चिमी यूरोप के देश अपने-अपने खेमों में एक-दूसरे के नजदीक आए।
⦁    मार्शल योजना-1947-इस योजना के तहत अमेरिका ने यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए अभूतपूर्व सहायता की।
⦁    नाटो-अमेरिका ने नाटो के तहत पश्चिमी यूरोप में एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का गठन किया।
⦁    यूरोप आर्थिक सहयोग संगठन-मार्शल योजना के तहत सन् 1948 में यूरोप आर्थिक सहयोग संगठन के माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों ने व्यापार और आर्थिक मामलों में एक-दूसरे की सहायता शुरू की।
⦁    यूरोपीय परिषद्-5 मई, 1949 को यूरोपीय परिषद् की स्थापना हुई जिसके तहत आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए अपनी सामान्य विरासत के आदर्शों और सिद्धान्तों में एकता लाने का प्रयास किया गया।
⦁    यूरोपीय कोयला तथा इस्पात समुदाय-18 अप्रैल, 1951 को पश्चिमी यूरोप के छह देशों ने यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय का गठन किया।
⦁    यूरोपीय अणु शक्ति समुदाय तथा यूरोपीय आर्थिक समुदाय-25 मार्च, 1957 को यूरोपीय आर्थिक समुदाय (यूरोपीय साझा व्यापार) और यूरोपीय अणुशक्ति समुदाय का गठन किया गया।
⦁    मास्ट्रिस्ट सन्धि (1991)-इस सन्धि ने यूरोप के लिए एक अर्थव्यवस्था, एक मुद्रा, एक बाजार, एक नागरिकता, एक संसद, एक सरकार, एक सुरक्षा व्यवस्था तथा एक विदेश नीति का मार्ग प्रशस्त किया।
⦁    यूरोपीय संघ (1992)-सन् 1992 में यूरोपीय संघ के रूप में समान विदेश और सुरक्षा नीति, आन्तरिक मामलों तथा न्याय से जुड़े मुद्दों पर सहयोग और एक-समान मुद्रा के चलन के लिए रास्ता तैयार हो गया। 1 जनवरी, 1999 को यूरोपीय संघ की साझा यूरो मुद्रा को औपचारिक रूप से स्वीकृति दे दी तथा 2007 में लिस्बन सन्धि कर निर्णय प्रक्रिया में सुधार का महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया।



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