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एक भूमंडलीकरण अर्थव्यवस्था के विशिष्ट लक्षण क्या हैं? चर्चा कीजिए।

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एक भूमंडलीकरण अर्थव्यवस्था के विभिन्न लक्षण :

⦁    भूमंडलीकरण का तात्पर्य विश्व के लोगों, क्षेत्रों तथा देशों के बीच वैश्विक स्तर पर सामाजिक-आर्थिक अंतरर्निर्भरता में वृद्धि से है।

⦁    यद्यपि आर्थिक शक्तियाँ भूमंडलीकरण का एक
अभिन्न अंग हैं, लेकिन यह कहना गलत होगा कि अकेले वे शक्तियाँ ही भूमंडलीकरण को उत्पन्न करती हैं। भूमंडलीकरण में सामाजिक तथा आर्थिक संबंधों का विश्वभर में विस्तार सम्मिलित है। यह विस्तार कुछ
आर्थिक नीतियों के द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। इस प्रक्रिया को भारत में उदारीकरण कहा जाता है। उदारीकरण शब्द का तात्पर्य ऐसे नीतिगत निर्णय से है, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाज़ार के लिए खोल देने के उद्देश्य से किए गए थे। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था पर अधिक नियंत्रण रखने के लिए सरकार द्वारा इससे पहले अपनाई जा रही नीति पर विराम लग गया।

⦁    भूमंडलीकरण के दौरान अनेक आर्थिक कारकों में से पार राष्ट्रीय निगमों (TNCs) की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है।

⦁    जुलाई, 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने सभी प्रमुख क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, व्यापार, विदेशी निवेश) और प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक क्षेत्र, वित्तीय संस्थाएँ आदि में सुधारों की एक लंबी श्रृंखला देखी है। इसके पीछे मूलभूत अवधारणा यह थी कि भूमंडलीय बाजार में पहले से अधिक समावेश करनी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

⦁    उदारीकरण की प्रक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से ऋण लेना भी शामिल है। ये ऋण कुछ निश्चित दरों पर दिए जाते हैं। सरकार को कुछ विशेष प्रकार से आर्थिक उपाय करने के लिए वचनबद्ध होना पड़ता है और इन आर्थिक उपायों के अंतर्गत संरचनात्मक समायोजन की नीति अपनानी पड़ती है। इन समायोजनों की अर्थ सामान्यतः सामाजिक क्षेत्रों; जैसे–स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा में राज्य के व्यय की कटौती है। विश्व व्यापार संगठन (W.T.O) जैसी अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय संस्थाओं के लिए भी यह बात कही जा सकती है।



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