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एक गरीब और गृहविहीन दंपती को समाजशास्त्रीय कल्पना द्वारा कैसे समझा जा सकता है? 

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एक गरीब एवं गृहविहीन दंपती की समाजशास्त्रीय कल्पना इसे एक जनहित मुद्दे के रूप में देखने तथा इसके कारणों की खोज करने पर बल देती है। समाज की संरचना में ऐसी कौन-सी विसंगतियाँ हैं जो कुछ दंपतियों को गरीब एवं गृहविहीन बनाती हैं, जबकि अन्य को अमीर एवं ओलीशान मकानों में रहने का अवसर प्रदान करती है। समाजशास्त्रीय कल्पना हमें एक गरीब एवं गृहविहीन दंपती की स्थिति को भगवान की देन मानने से रोकती है तथा हमारा ध्यान समाज की विसंगतियों की ओर दिलाने का प्रयास करती है।



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