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एकाकी परिवार के सम्बन्धों के मनोविज्ञान पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

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एकाकी परिवार में सदस्यों के मनोवैज्ञानिक सम्बन्धों की दृष्टि से निम्नलिखित तथ्य महत्त्वपूर्ण हैं।

1. बच्चों- का मनोवैज्ञानिक सम्वन्य एकाकी परिवार में बच्चे अपनी मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं; जैसे-स्नेह, ममता, सुरक्षा आदि की पूर्ति हेतु पूर्णत: माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। माता-पिता को व्यस्तता अथवा अन्य किसी कारण। इन आवश्यकताओं की पूर्ति न होने पर बच्चों के व्यक्तित्व का उचित विकास नहीं हो पाता है।

2. पति- पत्नी का मनोवैज्ञानिक सम्बन्ध एकाही परिवार में पति-पत्नी को भूमिका गाढ़ी के दो पहिए के समान होती है। अत: जीवन के सुचारु संचालन के लिए इनमें परस्पर सामंजस्य एवं सनसन स्थापित होना अति आवश्यक है। किसी एक में भी सवोच्चता का भाव, परिवार को विटित करने की क्षमता रखता है। आवश्यक है कि पति-पत्नी में परस्पर विश्वास हो, दोनों एक-दूसरे की सुरक्षा एवं प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील हो और * दोनों एक-दूसरे को भूमिका के महत्व को समझें।

3. माता- पिता एवं पुत्र/पुत्री का मनोवैज्ञानिक सम्बन्ध बाल्यावस्था तक सन्तान माता के संरक्षण में अधिक रहती हैं, किन्तु इसके पश्चात् की। अवस्था में पुत्र, पिता के मार्गदर्शन में स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करता है। पिता भी पुत्र को अपना सहयोगी मानते हैं एवं उसके भावी जीवन को निर्देशित करते हैं। दूसरी ओर पुत्रियां माता के ऑपक नगदक होती है। एवं माता के साथ प्रई, कोमल व ममतापूर्ण सम्बन्ध विकसित करती हैं। पुत्रियों के पराया धन होने की भावना भी माता में उनके प्रति विशेष लगाव उत्पन्न करती है। वस्तुतः माता एवं पुत्री के मध्य मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध एक आदर्श स्थिति को इंगित करते हैं। एकाकी परिवार का अस्तित्व उपरोक्त वर्णित मनोवैज्ञानिक बन्यों की गहन समझ पा निर्भर करता है। इनकी समझ के अभाव में पारिवारिक सम्बन्धों में तनाव ापन होने की सम्भावना चत तो है।



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