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Answer» एकहरा लेना पद्धति अर्थात् जब व्यापार-धंधा सीमित प्रमाण में हो ऐसे छोटे व्यापारियों द्वारा संपूर्ण हिसाब तैयार न करके सिर्फ रोकड़बही या खाताबही बनाकर उसमें सिर्फ नकद के व्यवहार और व्यक्तिगत खाते से संबंधित व्यवहार ही लिखे जाते है । उसमें व्यवसाय के सभी व्यवहारों की दोहरी असर नहीं दी जाती । जिस प्रकार की व्यवसाय की आवश्यकता हो उस प्रकार अमुक व्यवहारों की सिर्फ एक ही असर दी जाती है, इसलिए यह एकहरा लेखा प्रणाली के रूप में जानी जाती है । एकहरा लेखा प्रणाली के लक्षण (Characteristics of Single Entry System) : - फुटकर व्यवसाय करनेवाले : सामान्य रूप से लारीवाले, गल्लेवाले, फेरिया या फुटकर व्यवसाय करनेवाले छोटे व्यापारी ही एकहरा प्रणाली के अनुसार हिसाब रखते है ।
- दिनोंधी नामा पद्धति का सिद्धांत : एकहरा लेखा प्रणाली में अमुक व्यवहारों की दो असर दी जाती है वहाँ द्विलेखा प्रणाली के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है ।
- एकहरा और दिलेखा प्रणाली का संयुक्त मिश्रण : इस प्रणाली में अमुक व्यवहारों की एक ही असर जबकि अमुक व्यवहारों की दो असर दी जाती है । जिससे दोनों पद्धतियों का संयुक्त मिश्रण देखने को मिलता है ।
- समानता में कमी : इस प्रणाली में कोई व्यापारी रोकड़बही रखता है तो कोई व्यापारी सहायक बही रखता है । अर्थात्, व्यापारियों के हिसाब रखने की पद्धति में कोई समानता देखने को नहीं मिलती ।
- आवश्यकता अनुसार बहियाँ : व्यापारी सिर्फ आवश्यकता के अनुसार मर्यादित बहियाँ जैसे : रोकड़बही या खाताबही रखते है ।
- आंतरिक व्यवहारों का लेखा : इस पद्धति में संपत्ति पर घिसाई या पूँजी पर ब्याज जैसे व्यवसाय के आंतरिक व्यवहारों की कोई असर नहीं दी जाती ।
- अपूर्ण लेखा : व्यापारी द्वारा अमुक व्यवहारों की सिर्फ एक ही असर दी जाने से व्यवहारों का लेखा अपूर्ण रहता है ।
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