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गाँव तथा नगर के जीवन में क्या अंतर है और तुम्हें कौन-सा जीवन रुचिकर लगता है? क्यों?

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गाँव के जीवन में सादगी सरलता है। किसी तरह की बनावट और तड़क-भड़क नहीं है। लोग शांति से अपने-अपने काम करते हैं। नदी-कुएँ का पानी पीते हैं। वे अपने खेतों में उगाया अनाज तथा ताजी सब्जियाँ खाते हैं। लोग कच्चे घरों में रहते हैं, पर उनका जीवन प्रकृति के बहुत नजदीक होता है।

नगर के जीवन में तड़क-भड़क और बनावट अधिक होती है। लोग आधुनिक और फैशनेबल कपड़े पहनते हैं। वे पक्के मकानों में रहते हैं। वे नल का पानी पीते हैं और बाजार से अनाज तथा फल-सब्जी खरीदकर खाते हैं। नगर की सड़कों पर वाहनों का हमेशा शोर होता है। लोग दूकानों, बैंकों और दफ्तरों में काम करते हैं। नगर के जीवन में शांति नहीं होती।

लोगों का जीवन प्रकृति से बहुत दूर होता है। नगर के जीवन में अनेक दोष हैं, फिर भी मुझे यहाँ का जीवन ही पसंद है। यहाँ के लोग शिक्षित और प्रगतिशील होते हैं। नगर में अच्छे स्कूल और कॉलेज होते हैं। इनके कारण मनपसंद शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की जा सकती हैं। अनेक संस्थाएँ, पुस्तकालय आदि व्यक्ति की योग्यता बढ़ाने में सहायक होते हैं। उन्नति के जितने अवसर नगर में हैं, उतने गाँव में नहीं, इसलिए मुझे नगरीय जीवन ही रुचिकर लगता है।



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