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घिसाई की गणना किस-किस उद्देश्य से की जाती है ? |
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Answer» घिसाई के उद्देश्य (आवश्यकता) (Necessity (Objectives) of Provision for Depreciation) : घिसाई यह व्यावसायिक विभिन्न प्रकार के खर्चों में से एक अलग प्रकार का राजस्व खर्च गिना जाता है । यह अन्य खर्च किराया, वेतन, मजदूरी वगैरह खर्च की तरह वास्तव में नकद चुकाया खर्च नहीं है । निम्न दर्शायी गयी जानकारियाँ घिसाई गिनने की आवश्यकता का उद्देश्य स्पष्ट करती है । (1) धंधे के खर्च के रूप में गिनना : व्यवसाय के अन्य राजस्व खर्च की तरह घिसाई भी समय आधारित राजस्व खर्च के रूप में गिना जाता है । इसे रोकड़ में गिना नहीं जाता । घिसाई यह अग्रीम चुकाया खर्च होने की वजह से प्रमाणसर राशि प्रत्येक हिसाबी वर्ष के अंत में घिसाई के रूप में अपलिखित की जाती है । (2) धंधे का सही और योग्य लाभ-हानि जानने के लिये : घिसाई की राशि को लाभ-हानि खाते के उधार पक्ष में दर्शाकर धंधे का योग्य और सही लाभ-हानि जाना जा सकता है । प्रत्येक धंधे में लाभ कमाने के लिये संपत्ति का योगदान रहा हुआ है । इस संपत्ति की उपयोगिता के कारण होनेवाली घिसाई अगर लाभहानि खाते में दर्शाया न जाये तो वह धंधा सही और योग्य स्थिति नहीं दर्शायेगा । (3) धंधे की सही और योग्य आर्थिक परिस्थिति जानने के लिये : प्रत्येक आर्थिक चिट्ठा अपने धंधे की सही आर्थिक परिस्थिति दर्शाता है । आर्थिक चिट्ठा में संपत्ति की घिसाई घटाने के बाद की किंमत अगर दर्शायी जाये तब वह व्यवसाय की सही परिस्थिति प्रस्तुत करता है । जिसके आधार पर व्यवसाय की सही और योग्य स्थिति जानी जा सकती है । (4) उत्पादन की सही लागत तय करना : उत्पादित किये जानेवाले माल या सेवा की लागत किंमत तय करते समय उत्पादन को असर करनेवाले अथवा उत्पादन से जुड़े हुए तमाम खर्चों को ध्यान में लेना चाहिए । घिसाई की गणना वह भी उत्पादन से जुड़ा खर्च होने से उसे अगर ध्यान में नहीं लिया जायेगा तो उत्पादित वस्तु की सही लागत तय नहीं की जा सकती । (5) वस्तु या सेवा की सही बिक्री किंमत तय करना : किसी भी वस्तु या सेवा की बिक्री किंमत तय करने के लिये कुल लागत तय – करना आवश्यक है, जिसमें घिसाई का भी समावेश करना अनिवार्य है । अन्य राजस्व खर्च की तरह घिसाई को भी खर्च के रूप में साथ में लेने से सही बिक्री किंमत तय करने का कार्य सरल बनता है । (6) पूँजी बनाये रखना : धंधे में लगायी गयी पूँजी में से ज्यादातर पूँजी स्थिर संपत्तियों में लगी रहती है । ऐसी संपत्तियाँ उसके उपयोगी आयुष्य के दरम्यान बिनउपयोगी बनती है । उनके स्थान पर नयी संपत्ति खरीदने या बसाने के लिये पूँजी की आवश्यकता रहती है । ऐसी पूँजी व्यवसाय में बनाये रखने के उद्देश्य से धंधे में संपत्ति पर घिसाई का प्रावधान करना आवश्यक बन जाता है । (7) कानूनी बातों का पालन करने के लिए : कंपनी कानून में कहे गये अनुसार घिसाई गिनना अनिवार्य है । कंपनी कानून के अनुसार कोई भी कंपनी लाभ में से घिसाई गिनने के पहले अपना डिविडेन्ड नहीं बाँट सकती । व्यक्तिगत मालिकी या साझेदारी पेढ़ी में घिसाई गिनना अनिवार्य न होने के बावजूद सामान्य सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक घिसाईपात्र संपत्ति पर घिसाई की गणना अनिवार्य है । |
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