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घिसाई की व्याख्या देकर घिसाई के तत्त्वों की चर्चा करो । |
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Answer» घिसाई की व्याख्या (Definition of Depreciation) : (i) कार्टर : ‘संपत्ति की किंमत में किसी भी कारणसर क्रमश: और स्थायी कमी हो उसे घिसाई कहा जाता है ।’ (ii) स्पाईसर और पेग्लर : ‘घिसाई यह दिये गये समय के दरम्यान अमुक कारणसर संपत्तियों के असरकारक आयुष्य की कमी का माप है ।’ उपरोक्त व्याख्याओं पर से कहा जा सकता है कि संपत्ति की किंमत में उत्तरोत्तर होनेवाली कमी घिसाई कहलाती है । निश्चित किये गये समय के पश्चात् संपत्ति बिनउपयोगी बन जाती है । घिसाई यह समय से संबंधित खर्च है और उसे राजस्व खर्च के रूप में लाभ- . हानि खाते के उधार पक्ष में बताया जाता है । घिसाई को असर करनेवाले तत्त्व : घिसाई यह स्थायी संपत्ति के उपयोगिता मूल्य में होनेवाली कमी है । संपत्ति की उपयोगिता मूल्य में होनेवाली तत्त्व या कारण निम्न है : (1) संपत्ति का उपयोग : किसी भी संपत्ति के उपयोग के कारण उसकी कार्यक्षमता में कमी आती है । जिससे उसके उपयोगी आयुष्य और उपयोगिता मूल्य में कमी होती है । वर्ष के दरम्यान संपत्ति की किंमत में होनेवाली कमी घिसाई दर्शाती है । (2) समय का तत्त्व : धंधे में प्रत्येक संपत्ति का आयुष्य समय पूरा होने पर अपने आप पूरा हो जाता है । भाडापट्टे जैसी संपत्तियों का उपयोगी आयुष्य पहले से निश्चित होने से ऐसी संपत्तियों का उपयोगी आयुष्य समय के साथ घटता जाता है और निश्चित समय के अंत में उसकी किंमत शून्य गिनी जाती है । कितनी बार अमुक समय तक बिन उपयोगी रहने के बावजूद उसके मूल्य में कमी होती है । यह कमी भी घिसाई कहलाती है । (3) मात्रा में क्रमश: कमी : खनिज की खान या तेल के कुओं जैसी संपत्तियों का मूल्य उसमें रहे हुए खनिज तेल की मात्रा पर आधारित होता है । कुल मात्रा में जैसे-जैसे मात्रा का उपयोग होता जाता है वैसे-वैसे उस अनुपात में उस संपत्ति का उपयोगी मूल्य घटता जाता । है । इस प्रकार ऐसी संपत्तियों की घिसाई मात्रा की कमी पर तय करता है । ऐसी संपत्तियों की चुकाई गई किंमत में से प्रमाणसर राशि घिसाई के रूप में अपलिखित किया जाता है । (4) बाजार किंमत में स्थायी कमी : बदलते जमाने में आधुनिकता का रंग चढ़ा है । पुराने प्रकार की संपत्तियाँ आज के उत्पादन या व्यापार के साथ अनुकूल नहीं होती । नित नये आधुनिक उत्पादन बाजार में आने से पुराने प्रकार की संपत्तियों का चलन घटता जाता है । ऐसी स्थिति में स्थिर संपत्तियों की बाजार किंमत में स्थायी कमी के कारण जितनी राशि कम होती है वह घिसाई कहलाती है । (5) दुर्घटना (अकस्मात) : कितनी बार संपत्ति के उपयोग के दरम्यान या स्थानांतरण के कारण वह संपत्ति दुर्घटनाग्रस्त बनती है । जिससे संपत्ति की उपयोगिता और उसका आयुष्य घटने से संपत्ति की किंमत में कमी आती है । ऐसी संपत्तियों को अगर मरम्मत कराया जाये तब वह खर्च उसकी किंमत से बढ़ जाता है इसलिए वह संपत्ति अनुपयोगी बनने से उसके मूल्य की शेष रकम नुकसान के रूप में या अतिरिक्त घिसाई के रूप में गिननी चाहिए। (6) नयी खोज और संशोधन : आज के इस आधुनिक और परिवर्तनशील युग में समय के साथ-साथ नए संशोधन और खोज होने से नई टेक्नोलॉजी और संशोधनों के कारण नई आधुनिक संपत्तियाँ बाजार में आती रहती है । इस नई संपत्तियों की तुलना में वर्तमान में उपयोग में ली जानेवाली संपत्तियाँ कम या अकार्यक्षम या कम लाभदायक सिद्ध होती है । इस प्रकार संपत्ति के उपयोगिता मूल्य में कमी होती है जो घिसाई कहलाती है । (7) प्राकृतिक तत्त्व : घिसाई के लिये ज्यादातर प्राकृतिक तत्त्व भी जिम्मेदार है । बाढ़, भूकंप, तूफान जैसे प्राकृतिक तत्त्व ज्यादातर संपत्ति को अनुपयोगी या अल्पायु बना देते हैं । जिससे संपत्ति की किंमत में कमी होती है । वह घिसाई कहलाती है । |
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