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घर की अव्यवस्था या व्यवस्था के अभाव से होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए।

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गृह-व्यवस्था हर प्रकार से लाभदायक एवं महत्त्वपूर्ण होती है। इसके विपरीत यदि घर में अव्यवस्था या व्यवस्था का अभाव हो, तो विभिन्न प्रकार की हानियाँ हो सकती हैं। घर की अव्यवस्था से होने वाली मुख्य हानियाँ निम्नलिखित हैं

(1) कुशलता की कमी हो जाती है:
यदि घर में समुचित व्यवस्था का अभाव हो, तो परिवार का कोई भी सदस्य अपने कार्य को कुशलतापूर्वक नहीं कर पाता। इस स्थिति में पारिवारिक कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पाते तथा परिवार की सुख-समृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है।

(2) सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि:
कार्यकुशलता का अभाव अथवा फूहड़पने समाज में परिवार की प्रतिष्ठा को गिराता है। फूहड़ स्त्री न तो समाज में सम्मान प्राप्त कर पाती है और न ही स्वयं अपने घर में। फूहड़पन से परिवार में कलह का वातावरण उत्पन्न होता है।

(3) धन एवं अन्य साधनों की बर्बादी:
अव्यवस्थित गृहिणियाँ पारिवारिक साधनों का अनुचित व अनावश्यक उपयोग करती हैं। ये आवश्यकता से अधिक भोजन बनाती हैं, जिससे इसकी बर्बादी होती है। इसी प्रकार अव्यवस्थित घर में अन्य खाद्य पदार्थों, वस्त्रों, सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्रियों आदि की बर्बादी होती है। अव्यवस्थित गृहिणियाँ पारिवारिक बजट नहीं बनातीं, जिसके फलस्वरूप धन का अपव्यय होता है तथा परिवार कभी भी आर्थिक सुदृढ़ता नहीं प्राप्त कर पाता है।

(4) स्वास्थ्य की हानि:
गृह-व्यवस्था के अभाव में कुछ गृहिणियाँ भोजन एवं पोषण का आवश्यक ध्यान नहीं रखतीं, जिसके फलस्वरूप परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। स्वच्छता के अभाव में अव्यवस्थित घर में विभिन्न प्रकार के रोगाणु पनपते रहते हैं जो कि विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न करते हैं।

(5) दुर्घटनाएँ:
आजकल घरों में विद्युत-चलित विभिन्न उपकरण, कुकिंग गैस व विभिन्न प्रकार की जटिल मशीनों एवं यन्त्रों का उपयोग किया जाता है। सुचारु गृह-व्यवस्था के अभाव में गृहिणी की थोड़ी-सी असावधानी किसी भी छोटी अथवा बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। एक अव्यवस्थित घर में इस प्रकार की घटनाएँ प्रायः होती रहती हैं।

(6) पारिवारिक समन्वय व अनुशासन का अभाव:
एक अव्यवस्थित परिवार के सदस्यों में पारस्परिक समन्वय का सदैव अभाव रहता है। सभी सदस्य नियोजन व नियन्त्रण के सिद्धान्तों को महत्त्व न देकर अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कार्यकुशलता का अभाव रहता है तथा पारिवारिक कलह का वातावरण बना रहता है।



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