1.

गोपालकृष्ण गोखले व बाल गंगाधर तिलक का परिचय देते हुए दोनों की विचारधारा के अन्तर को समझाइए।

Answer»

गोपालकृष्ण गोखले- कांग्रेस के उदारवादी नेताओं में गोपालकृष्ण गोखले का प्रमुख स्थान है। ये एक प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति थे। इनका जन्म 9 मई, 1866 ई० को महाराष्ट्र के एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सन् 1902 ई० में ये फर्युसन कॉलेज के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए तथा अपनी बुद्धिमता और कर्त्तव्यपरायणता के कारण ‘सार्वजनिक सभा’ के मन्त्री बने। यह सभा बम्बई की एक प्रमुख राजनीतिक संस्था थी। सन् 1889 ई० में इन्होंने भारतीय राष्ट्रीयता कांग्रेस में प्रवेश किया।

सन् 1902 ई० में ये केन्द्रीय व्यवस्थापिका के सदस्य निर्वाचित हुए। सदस्य बनने के बाद इन्होंने नमक-कर-उन्मूलन, सरकारी नौकरियों में चुनाव, अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के प्रसार, स्वतन्त्र भारतीय अर्थव्यवस्था आदि के पक्ष में सराहनीय प्रयत्न किए। मिण्टो-मालें सुधार योजना के निर्माण में उनका सक्रिय योगदान रहा था। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए भी प्रयत्न किया। उनके अपने देश के प्रति नि:स्वार्थ सेवा-भाव को देखकर, लॉर्ड कर्जन जैसे व्यक्ति ने भी उनकी प्रशंसा में कहा था, “ईश्वर ने आपको असाधारण योग्यता दी है और आपने बिना किसी शर्त के इसको देश-सेवा में लगा दिया है।

सन् 1905- 1907 ई० में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के प्रतिक्रियावादी कार्यों का कड़ा विरोध किया। इसके साथ ही स्वतन्त्रता को संवैधानिक ढंग से प्राप्त करने में भी प्रयत्न किया। इन्होंने सन् 1905 ई० में भारत सेवक समिति नामक संस्था की स्थापना की। इस संस्था का लक्ष्य मातृ-भाषा के प्रति आदर की भावना उत्पन्न करना और ऐसे सार्वजनिक कार्यकताओं को शिक्षित करना था, जो देश के उन्नति के लिए संवैधानिक रूप से कार्य करें। गोखले ने भारत में सुधारों की एक योजना भी तैयार की, जिसे गोखले की ‘राजनीतिक वसीयत’ या ‘इच्छा-पत्र’ कहा जाता है।
बाल गंगाधर तिलक- बाल गंगाधर तिलक कांग्रेस के उग्रवादी दल के प्रतिभासम्पन्न नेता थे। भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में उग्रवादी विचारधारा के वे ही जन्मदाता थे। उन्होंने ही सबसे पहले नारा लगाया, “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।” वास्तव में, उन्होंने ही देश में चल रहे राष्ट्रीय आन्दोलन को तीव्र गति प्रदान की थी तथा कांग्रेस के आन्दोलन को जन-आन्दोलन में परिवर्तित करने का सराहनीय कार्य किया था।

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 12 जुलाई, 1856 ई० में रत्नागिरि के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। अपना अध्ययन कार्य समाप्त करने के बाद वे ‘दक्षिण शिक्षा समिति द्वारा स्थापित पूना के न्यू इंग्लिश स्कूल में गणित के अध्यापक नियुक्त हो गए। तिलक जी स्वभाव से निर्भीक, दृढ़-निश्चयी एवं स्वाभिमानी थे। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया। 1 अगस्त, 1920 ई० को ये 64 वर्ष की आयु पूरी कर स्वर्ग सिधार गए।

तिलक और गोखले की विचारधारा में अन्तर- तिलक एवं गोखले दोनों उच्चकोटि के महान् देशभक्त एवं राष्ट्रीय नेता थे किन्तु दोनों के विचारों में मौलिक अन्तर था। डॉ० पट्टाभि सीतारमैय्या ने अपने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में तिलक और गोखले की तुलना इस प्रकार की है- तिलक और गोखले दोनों ऊँचे दर्जे के देशभक्त थे। दोनों ने जीवन में भारी त्याग किया था, परन्तु उनके स्वभाव एक-दूसरे से बहुत भिन्न थे। यदि हम उस समय की भाषा का प्रयोग करें तो कह सकते हैं कि गोखले नरम विचारों के थे और तिलक गरम विचारों के। गोखले मौजूदा संविधान को मात्र सुधारना चाहते थे लेकिन तिलक उसे नए सिरे से बनाना चाहते थे। गोखले को नौकरशाही के साथ मिलकर कार्य करना था, तिलक को उससे अनिवार्यतः संघर्ष करना था। गोखले जहाँ सम्भव हो, सहयोग करने तथा जहाँ जरूरी हो, विरोध करने की नीति के पक्षपाती थे। तिलक का झुकाव रुकावट तथा अडंगा डालने की नीति की ओर था। गोखले को प्रशासन तथा उनके सुधार की मुख्य चिन्ता थी, तिलक के लिए राष्ट्र तथा उसका निर्णय मुख्य था। गोखले का आदर्श था- प्रेम और सेवा, तिलक का आदर्श था- सेवा और कष्ट सहना। गोखले विदेशियों को अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करते थे, तिलक का तरीका विदेशियों को देश से हटाना था। गोखले दसरों की सहायता पर निर्भर करते थे, तिलक अपनी सहायता स्वयं करना चाहते थे। गोखले उच्च वर्ग और शिक्षित लोगों की ओर देखते थे, तिलक सर्वसाधारण या आम जनता की ओर। गोखले का अखाड़ा था- कौंसिल भवन, तिलक का मंच था- गाँव की चौपाल। गोखले अंग्रेजी में लिखते थे, तिलक मराठी में। गोखले का उद्देश्य था- स्वशासन, जिसके लिए लोगों को अंग्रेजों द्वारा पेश की गई कसौटी पर खरा उतरकर अपने को योग्य साबित करना था, तिलक का उद्देश्य था- स्वराज्य, जो प्रत्येक भारतवासी का जन्मसिद्ध अधिकार था और जिसे वे बिना किसी बाधा की परवाह किए लेकर ही रहेंगे। गोखले अपने समय के साथ थे, जबकि तिलक अपने समय के बहुत आगे।।



Discussion

No Comment Found