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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार कैसे बढ़ाया जा सकता है व्याख्या कीजिए |
| Answer» EXPLANATION:शहरी क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि : देश के इतिहास में पहली बार इंजीनियरिंग सीटों के मुकाबले आईटीआई की सीटों की संख्या बढ़ी है। सीटें बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी फोकस किया जा रहा है। दूसरे देशों में इंजीनियरिंगों के मुकाबले पांच गुणा टेक्नीशियन होते हैं।सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में 25 लाख छात्रों को प्रशिक्षित किया जाए। केंद्र सरकार ने पिछले दो सालों में रि-स्ट्रक्चरल की योजना औद्योगिक विकास की ओर बढ़ने की कवायद की है। दुनिया के पैंतालिस फीसदी देशों में कौशल है।जापान, कोरिया, अमेरिका की तरह ही देश में कौशल विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है। किसी भी क्षेत्र में अगर आगे बढ़ना है तो कौशल विकास ही एकमात्र माध्यम है। जिस तरह शिक्षा को महत्व दिया है, उसी तरह कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाए, तो रोजगार अवश्य मिलेगा। भारत कई वर्षों तक मुख्यतः शिक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित करता रहा है और अब उसे लोगों की काबिलियत बढ़ाने एवं रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार दिया जा सके। देश कौशल विकास में कम से कम पचास साल पीछे चल रहा है।विभिन्न राष्ट्रों के बीच भारत को एक महान शक्ति के तौर पर उभारने की चुनौती को ध्यान में रखते हुए अगले पांच साल से दस साल काफी महत्वपूर्ण है। कई विकासशील एवं विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में महज दो फीसदी हुनरमंद लोग हैं। जिन्हें प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है।ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ाने के लिए छोटे शहरों का हो विकास : ग्रामीण भारत के औद्योगिकरण के लिए छोटे शहरों को केंद्र में रखकर कृषि आधारित शहरीकरण का रोडमैप तैयार करना जरूरी है, तभी उन क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ेगा.ति व्यक्ति ज़मीन के अनुपात में कमी आने से कृषि क्षेत्र से और रोज़गार पैदा करने में दिक्कत हो रही है, जबकि इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. कृषि जनगणना (एग्रीकल्चर सेंसस) 2010-11 में बताया गया था कि एक व्यक्ति के पास औसत 1.15 हेक्टेयर ज़मीन रह गई है. ऐसे में 70 प्रतिशत उन ग्रामीण परिवारों का जीवनयापन सिर्फ खेती से नहीं चल सकता, जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम ज़मीन है. वहीं, नेशनल सैंपल सर्वे (70वें दौर) के मुताबिक, ऐसे सीमांत किसान खेती से जितना कमाते हैं, हर महीने उससे वे खपत यानी कंजम्पशन पर खर्च कर रहे हैं. | |