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Answer» गृह-व्यवस्था का अध्ययन करते समय यह जानना भी आवश्यक है कि गृह-व्यवस्था को क्यों लागू किया जाना चाहिए? प्रत्येक परिवार के कुछ लक्ष्य होते हैं, जिन्हें सूझ-बूझकर तथा अपने साधनों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए गृह-व्यवस्था अनिवार्य है। गृह-व्यवस्था द्वारा परिवार के निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है तथा इन्हें ही गृह-व्यवस्था का उद्देश्य कहा जा सकता है गृह-व्यवस्था के प्रमुख उद्देश्य (1) परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति: प्रत्येक परिवार के सभी सदस्यों की अपनी-अपनी कुछ महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ होती हैं। ये आवश्यकताएँ सामान्य भी हो सकती हैं तथा विशिष्ट भी। उदाहरण के लिए–रोटी, कपड़ा तथा मकान की आवश्यकता प्रत्येक सदस्य की सामान् आवश्यकताएँ हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षा, चिकित्सा तथा विशेष प्रकार का आहार आदि भिन्न-भिन्न रूप में भिन्न-भिन्न सदस्यों की विशिष्ट आवश्यकताएँ हैं। व्यवस्थित गृह में इन सभी सामान्य तथा विशिष्ट आवश्यकताओं की समुचित रूप में पूर्ति होती रहनी चाहिए। गृह-व्यवस्था का यह एक मुख्य तथा महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है। (2) पारिवारिक आय को उचित प्रकार से खर्च करना: सभी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता होती है। प्रत्येक परिवार की आय सीमित होती है; अतः ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे सीमित आय में ही सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। इसके लिए पारिवारिक बजट बनाना तथा उसके अनुसार आय-व्यय में सन्तुलन बनाए रखना अनिवार्य है। आय-व्यय के सन्तुलित बजट को बनाकर, कुछ बचत भी की जा सकती है। परिवार के कल्याण एवं समृद्धि के लिए कुछ-न-कुछ बचत का होना अनिवार्य होता है। पारिवारिक आय-व्यय का नियोजन भी गृह-व्यवस्था के ही अन्तर्गत आता है। इस स्थिति में कहा जा सकता है कि गृह-व्यवस्था का एक उद्देश्य पारिवारिक आय को उचित प्रकार से एवं नियोजित रूप से उपभोग में लाना भी है। (3) पारिवारिक वातावरण को अच्छा बनाना: गृह-व्यवस्था का उद्देश्य न केवल भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना ही है, बल्कि पारिवारिक वातावरण को भी सौहार्दपूर्ण बनाना है। इसके लिए परिवार के सदस्यों के आपसी सम्बन्धों, अनुशासन एवं पारिवारिक मूल्यों को स्थापित करना भी गृह-व्यवस्था का ही उद्देश्य है। भारतीय समाज में पारिवारिक वातावरण को उत्तम बनाने में गृहिणी की विशेष महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। गृहिणी के विभिन्न कर्तव्य होते हैं, जिनके पालन से परिवार का वातावरण अच्छा बना रहता है तथा सभी सदस्य सन्तुष्ट रहते हैं। (4) परिवार के सदस्यों का नैतिक विकास: गृह-व्यवस्था का एक उल्लेखनीय उद्देश्य परिवार के सदस्यों, विशेष रूप से बच्चों एवं किशोरों का समुचित नैतिक विकास करना भी है। वास्तव में, नैतिक विकास के अभाव में गृह-व्यवस्था को सुचारु एवं उत्तम नहीं माना जा सकता। नैतिक विकास के लिए माता-पिता को नियोजित ढंग से प्रयास करने चाहिए तथा स्वयं आदर्श प्रस्तुत करने चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को नैतिक मूल्यों की नियोजित रूप से शिक्षा प्रदान करें। (5) पारिवारिक स्तर को उन्नत बनाए रखना: प्रत्येक परिवार के रहन-सहन का एक स्तर होता है, जिसका निर्धारण परिवार के साधनों के आधार पर होता है। गृह-व्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है-सब प्रकार से परिवार का एक समुचित स्तर बनाए रखना। इसके लिए रहन-सहन के एवं धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा दार्शनिक मूल्यों को ध्यान में रखना अत्यन्त आवश्यक है। | गृह-व्यवस्था के उपर्युक्त वर्णित उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि गृहस्थ जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए तथा परिवार के समस्त सदस्यों के सुख एवं समृद्धि में वृद्धि के लिए गृह-व्यवस्था का विशेष योगदान तथा महत्त्व होता है।
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