Saved Bookmarks
| 1. |
गरीबी की प्रकृतिवादी एवं समाजशास्त्रीय व्याख्या किस प्रकार से की जा सकती है? |
|
Answer» गरीबी की प्रकृतिवादी एवं समाजशास्त्रीय व्याख्या में स्पष्ट अंतर पाया जाता है। प्रकृतिवादी व्याख्या के अनुसार लोग गरीब इसलिए हैं क्योंकि वे काम से जी चुराते हैं, समस्यामूलक परिवारों से आते हैं, पारिवारिक बजट बनाने में अयोग्य हैं, उनमें बुद्धिमता की कमी है तथा कार्य के लिए स्थानांतरण से डरते हैं। यदि वे स्थानांतरण कर लेते तो हो सकता है उन्हें उचित रोजगार मिल जाता जो । उनकी निर्धनता के निराकरण में सहायक सिद्ध होता। समाजशास्त्रीय व्याख्या के अनुसार गरीबी का कारण समाज में असमानता की संरचना है और वे लोग इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं जिनकी कार्य की अनियमितता दीर्घकालिक है, जबकि उन्हें मिलने वाली मजदूरी कम होती है। |
|