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गुरुदेव प्रकृति, पशु-पक्षी से विशेष लगाव रखते थे। एक कुत्ता और एक मैना पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए।अथवागुरुदेव के प्रकृति प्रेम को अपने शब्दों में लिखिए। |
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Answer» गुरुदेव प्रकृति से बेहद प्रेम करते थे। बगीचे से टहलते हुए वे एक-एक फूल पत्तियों को देखते जाते थे। प्रकृति में होनेवाली हर गतिविधियों का ख्याल रखते थे। कुछ समय से कीए आश्रम में नहीं थे, यह गुरुदेव को पता था, लेखक और उनके साथी इस बात से अनभिज्ञ थे। श्रीनिकेतन में एकांत के समय वे अस्तगामी सूर्य की किरणों को देखने में मग्न रहते थे। गुरुदेव का पशु-पक्षी प्रेम भी अद्भुत था। शांतिनिकेतन में गुरुदेव के स्नेह का भागी वह कुत्ता श्रीनिकेतन में उन्हें खोजते-खोजते आ पहुँचा। गुरुदेव ने अपने इस कुत्ते पर आरोग्य में एक कविता भी लिखी है। मैना पक्षी के भीतर छिपे करुण भाव को भी गुरुदेव ने अपनी मर्मभेदी दृष्टि से परख लिया। उस पर भी गुरुदेव ने कविता लिस्नी है। अतः हम कह सकते हैं कि गुरुदेव प्रकृति से, पशु-पक्षियों से बेहद प्रेम करते थे। |
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