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गुरुदेव वहाँ बड़े आनंद में थे। अकेले रहते थे। भीड़-भाड़ उतनी नहीं होती थी, जितनी शांतिनिकेतन में। जब हम लोग ऊपर गए तो गुरुदेव बाहर एक कुर्सी पर चुपचाप बैठे अस्तगामी सूर्य की ओर ध्यानस्तिमित नयनों से देख रहे थे। हम लोगों को देखकर मुस्कराए, बच्चों से जरा छेड़छाड़ की, कुशल प्रश्न पूछे और फिर चूप हो रहे।ठीक उसी समय उनका कुत्ता धीरे-धीरे ऊपर आया और उनके पैरों के पास खड़ा होकर पूँछ हिलाने लगा। गुरुदेव ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा। वह आँखें मूंदकर अपने रोम-रोम से उस स्नेह-रस का अनुभव करने लगा। गुरुदेव ने हम लोगों की ओर देखकर कहा, “देखा तुमने, यह आ गए। कैसे इन्हें मालूम हुआ कि मैं यहाँ हूँ, आश्चर्य है ! और देखो, कितनी परितृप्ति इनके चेहरे पर दिखाई दे रही है।”1. लेखक जब गुरुदेव से मिलने गये तब ये क्या कर रहे थे ?2. लेखक के आने पर गुरुदेव ने क्या प्रतिक्रिया दी ?3. गुरुदेव ने किसकी पीठ पर हाथ फेरा और उसका क्या परिणाम हुआ ?4. ‘ठीक उसी समय उनका कुत्ता धीरे-धीरे ऊपर आया’। वाक्य में क्रियाविशेषण छाँटिये। |
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Answer» 1. लेखक जब गुरुदेव से मिलने गये तब वे अस्तगामी सूर्य की ओर ध्यान-स्तिमित नयनों से देख रहे थे। 2. लेखक के आने पर गुरुदेव मुस्कुराए, बच्चों से छेड़-छाड़ की, कुशल प्रश्न पूछे और फिर चुप हो गये। 3. गुरुदेव ने कुत्ते की पीठ पर हाथ फेरा और इसी के साथ वह आँखें मूंदकर अपने रोम-रोम से उस स्नेह-रस का अनुभव करने 4. धीरे-धीरे क्रिया विशेषण है। |
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