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गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को तीसरी दुनिया के देशों ने तीसरे विकल्प के रूप में समझा। जब शीतयुद्ध अपने शिखर पर था तब इस विकल्प ने तीसरी दुनिया के देशों के विकास में कैसे मदद पहुँचाई? |
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Answer» शीतयुद्ध की वजह से विश्व दो प्रतिद्वन्द्वी गुटों में बाँटा हुआ था। इसी सन्दर्भ में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नव-स्वतन्त्र देशों को एक तीसरा विकल्प दिया। यह विकल्प था दोनों महाशक्तियों के गुटों से अलग रहने का। महाशक्तियों के गुटों से अलग रहने की नीति का अभिप्राय यह नहीं है कि इस आन्दोलन से जुड़े देश अपने को अन्तर्राष्ट्रीय मामलों से अलग-थलग रखते हैं अथवा तटस्थता का पालन करते हैं। गुटनिरपेक्षता का अर्थ है-पृथकतावाद नहीं। तीसरी दुनिया के देशों के विकास में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन ने विशेष भूमिका निभायी। संक्षेप में इस तथ्य को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है- (1) गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में शामिल अधिकांश देशों को अल्प विकसित देश’ का दर्जा मिला हुआ था। इन देशों के सामने मुख्य चुनौती आर्थिक रूप से अधिक विकास करने तथा अपनी जनता को गरीबी से उबारने की थी। |
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