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'हार‌ के‌ आगे‌ जीत‌ है' ‌पाठ‌ ‌का‌ ‌सारांश‌ ‌अपने‌ ‌शब्दों‌ ‌में‌ ‌लिखो।‌

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‌‌तन,‌ ‌मन‌ ‌व‌ ‌आत्मा‌ ‌से‌ ‌जो‌ ‌मज़बूत‌ ‌होता‌ ‌है‌ ‌सफलता‌ ‌उसके‌ ‌कदम‌ ‌चूमती‌ ‌है।‌ ‌शारीरिक‌ ‌तंदुरुस्ती,‌ ‌मानसिक‌‌ संतुलन,‌ ‌आत्मबल‌ ‌इन‌ ‌तीनों‌ ‌प्रकार‌ ‌की‌ ‌क्षमताओं‌ ‌का‌ ‌दूसरा‌ ‌नाम‌ ‌ही‌ ‌”विल्मा‌ ‌ग्लोडियन‌ ‌रुडाल्फ़’‌ ‌है‌ ‌।‌ ‌अमेरिका‌ ‌के‌ ‌”टेनेसी”‌ ‌प्रान्त‌ ‌में‌ ‌एक‌ ‌रेलवे‌ ‌मज़दूर‌ ‌के‌ ‌घर‌ ‌में‌ ‌23‌ ‌जून,‌ ‌1940‌ ‌में‌ ‌विल्मा‌ ‌ने‌ ‌जन्म‌ ‌लिया।‌ ‌जिसकी‌ ‌माँ‌ ‌घर-घर‌ ‌जाकर‌ ‌झाडू-पोछा‌ ‌लगाती‌ ‌थी।‌ ‌विल्मा‌ ‌को‌ ‌चार‌ ‌वर्ष‌ ‌की‌ ‌उम्र‌ ‌में‌ ‌पोलियो‌ ‌हो‌ ‌गया‌ ‌था।‌ ‌तब‌ ‌से‌ ‌वह‌ ‌बैसाखियों‌ ‌के‌ ‌सहारे‌ ‌चलती‌ ‌थी‌ ‌।‌ ‌डॉक्टरों‌ ‌ने‌ ‌भी‌ ‌निस्सहायता‌ ‌प्रकट‌ ‌की‌ ‌।‌ ‌उसकी‌ ‌माँ‌ ‌बडी‌ ‌धर्म‌ ‌परायण,‌ ‌सकारात्मक‌ ‌मनोवृत्ति‌ ‌वाली‌ ‌साहसी‌ ‌महिला‌ ‌थी‌ ‌।‌ ‌विल्मा‌ ‌अपनी‌ ‌माँ‌ ‌से‌ ‌पूछती‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌क्या‌ ‌मैं‌ ‌दुनिया‌ ‌की‌ ‌सबसे‌ ‌तेज़‌ ‌धावक‌ ‌बन‌ ‌सकती‌ ‌हूँ?‌ ‌माँ‌ ‌ने‌ ‌प्यार‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌कहा‌ ‌कि‌ ‌”ईश्वर‌ ‌पर‌ ‌विश्वास,‌ ‌स्वयं‌ ‌पर‌ ‌भरोसा,‌ ‌मेहनत‌ ‌और‌ ‌लगन‌ ‌से‌ ‌तुम‌ ‌जो‌ ‌चाहे‌ ‌वह‌ ‌प्राप्त‌ ‌कर‌ ‌सकती‌ ‌हो’

माँ ‌की‌ ‌प्रेरणा‌ ‌व‌ ‌हिम्मत‌ ‌से‌ ‌9‌ ‌वर्ष‌ ‌की‌ ‌विल्मा‌ ‌बैसाखियाँ‌ ‌उतार‌ ‌फेंकी‌ ‌और‌ ‌उसने‌ ‌चलना‌ ‌प्रारंभ‌ ‌किया।‌ ‌वह‌ ‌कई‌ ‌बार‌ ‌जख़्मी‌ ‌होने‌ ‌पर‌ ‌भी‌ ‌हिम्मत‌ ‌न‌ ‌हारी‌ ‌।‌ ‌आख़िर‌ ‌एक‌ ‌साल‌ ‌के‌ ‌बाद‌ ‌वह‌ ‌बिना‌ ‌बैसाखियों‌ ‌के‌ ‌चलने‌ ‌में‌ ‌कामयाब‌ ‌हो‌ ‌गई।‌ ‌आठवीं‌ ‌कक्षा‌ ‌में‌ ‌पहली‌ ‌दौड‌ ‌प्रतियोगिता‌ ‌में‌ ‌हिस्सा‌ ‌लिया‌ ‌और‌ ‌वह‌ ‌सबसे‌ ‌पीछे‌ ‌रही।‌ ‌चार‌ ‌बार‌ ‌हार‌ ‌जाने‌ ‌के‌ ‌बाद‌ ‌पाँचवे‌ ‌बार‌ ‌प्रथम‌ ‌स्थान‌ ‌प्राप्त‌ ‌कर‌ ‌लिया।‌‌

15‌ ‌वर्ष‌ ‌की‌ ‌उम्र‌ ‌में‌ ‌विल्मा‌ ‌टेनेसी‌ ‌स्टेट‌ ‌विश्वविद्यालय‌ ‌में‌ ‌’टेंपल’‌ ‌नामक‌ ‌एक‌ ‌कोच‌ ‌से‌ ‌मिलकर‌ ‌उनसे‌ ‌वचन‌ ‌लिया‌ ‌कि‌ ‌”दौड‌ ‌की‌ ‌कला‌ ‌मैं‌ ‌सिखाऊँगा।”‌ ‌आखिर‌ ‌एक‌ ‌दिन‌ ‌विल्मा‌ ‌ओलंपिक‌ ‌में‌ ‌हिस्सा‌ ‌ले‌ ‌रही‌ ‌थी।‌ ‌विल्मा‌ ‌का‌ ‌मुकाबला‌ ‌”जुत्ता‌ ‌हेन”‌ ‌से‌ ‌था।‌ ‌जिसे‌ ‌कोई‌ ‌भी‌ ‌हरा‌ ‌नहीं‌ ‌पाया‌ ‌था।‌ ‌100‌ ‌मीटर‌ ‌दौड‌ ‌200‌ ‌मीटर‌ ‌दौड‌ ‌में‌ ‌विल्मा‌ ‌ने‌ ‌जुत्ता‌ ‌को‌ ‌दो‌ ‌बार‌ ‌हराकर‌ ‌दो‌ ‌स्वर्ण‌ ‌पदक‌ ‌जीता‌ ‌|‌ ‌अब‌ ‌400‌ ‌मीटर‌ ‌की‌ ‌रिले‌ ‌रेस‌ ‌में‌ ‌विल्मा‌ ‌का‌ ‌मुकाबला‌ ‌फिर‌ ‌जुत्ता‌ ‌से‌ ‌ही‌ ‌था।‌ ‌रिले‌ ‌में‌ ‌रेस‌ ‌का‌ ‌आखिरी‌ ‌हिस्सा‌ ‌टीम‌ ‌का‌ ‌सबसे‌ ‌तेज़‌ ‌खिलाडी‌ ‌ही‌ ‌दौडता‌ ‌है।‌ ‌पहले‌ ‌तीन‌ ‌खूब‌ ‌दौडे‌ ‌और‌ ‌’बेटन’‌ ‌भी‌ ‌आसानी‌ ‌से‌ ‌बदली‌ ‌|‌ ‌जब‌ ‌विल्मा‌ ‌के‌ ‌दौडने‌ ‌की‌ ‌बारी‌ ‌आयी‌ ‌उससे‌ ‌बेटन‌ ‌छूट‌ ‌गई‌ ‌।‌ ‌इधर‌ ‌दूसरी‌ ‌छोर‌ ‌पर‌ ‌जुत्ता‌ ‌तेज़ी‌ ‌से‌ ‌दौड़ी‌ ‌चली‌ ‌आ‌ ‌रही‌ ‌है।‌ ‌विल्मा‌ ‌ने‌ ‌गिरी‌ ‌हुई‌ ‌बेटन‌ ‌उठायी‌ ‌और‌ ‌यंत्र‌ ‌की‌ ‌तरह‌ ‌तेज़ी‌ ‌से‌ ‌दौडी‌ ‌और‌ ‌जुत्ता‌ ‌को‌ ‌तीसरी‌ ‌बार‌ ‌भी‌ ‌हराया‌ ‌और‌ ‌तीसरा‌ ‌स्वर्ण‌ ‌पदक‌ ‌जीता‌ ‌|‌ ‌एक‌ ‌पोलियो‌ ‌ग्रस्त‌ ‌महिला‌ ‌1960‌ ‌के‌ ‌रोम‌ ‌ओलम्पिक‌ ‌में‌ ‌दुनिया‌ ‌की‌ ‌सबसे‌ ‌तेज़‌ ‌धावक‌ ‌बन‌ ‌गयी‌ ‌और‌ ‌एक‌ ‌ही‌ ‌ओलम्पिक‌ ‌में‌ ‌तीन‌ ‌स्वर्ण‌ ‌पदक‌ ‌जीतने‌ ‌वाली‌ ‌पहली‌ ‌अमेरिकी‌ ‌’एथलीट’‌ ‌बनी‌ ‌।‌‌



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