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हे राम! की स्मृति ने लेखक को किस कठोर चट्टान पर पटक दिया ? |
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Answer» बापू की कुटिया में लेखक अपनी कल्पना में बापू को अपने बिस्तरे पर बैठे हुए यरवदा-चक्र धुमाते हुए तथा अन्य कार्य करते हुए देखते हैं। तभी लेखक की नजर दीवार पर उभरे ‘हे राम’ शब्द पर पड़ती है। वे एकाएक कल्पना-लोक से उठकर ऐसी कठोर चट्टान पर पटक दिए जाते हैं, जहाँ ‘हे राम’ शब्द ने उन्हें बापू के अपने बीच न होने का अहसास करा दिया। उन्हें लगा कि बापू उनसे छीन लिए गए हैं। |
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