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हिन्दी गद्य-शिक्षण को पाठ-योजना में उद्देश्य-कथन आता है1. पूर्वज्ञान के पश्‍चात्2. प्रस्‍तावना प्रश्‍न के पश्‍चात्3. आदर्श वाचन के पश्‍चात्4. मौन वाचन के पहले

Answer» Correct Answer - Option 2 : प्रस्‍तावना प्रश्‍न के पश्‍चात्
पाठयोजना हेतु प्रारूप:
  • पाठयोजना बनाने तथा पाठयोजना के प्रत्येक चरण को लिखने के लिए कई प्रकार के प्रारूप होते है।
  • परम्परागत पाठयोजना में सामान्य उद्देश्य, विशिष्ट उद्देश्य, सहायक सामग्री, पूर्व ज्ञान, प्रस्तावना, उद्देश्य कथन, शिक्षण विधि. बोध प्रश्न, श्यामपट्ट सारांश, मूल्यांकन, पुनरावृत्ति, गृह कार्य आदि होते है।

अतः हम कह सकते हैं कि हिन्दी गद्य-शिक्षण को पाठ-योजना में उद्देश्य-कथन प्रस्‍तावना प्रश्‍न के पश्‍चात् आता है।

पाठयोजना के पद निम्नवत है-

(क) सामान्य उद्देश्य(General Objective)- पाठयोजना बनाते समय या उसको लिखिते समय सबसे पहले सामान्य उद्देश्य निर्धारित कर लिखे जाते है सामान्य उद्देश्य के अन्तर्गत सम्बन्धित विषय के शिक्षण उद्देश्य को सम्मिलित किया जाता है जो हमारे दैनिक जीवन में व्यवहार परिवर्तन को सम्बोधित करता है। जैसे-
  • बच्चों की हिंदी भाषा में रूचि विकसित करना।
  • छात्रों में शुद्ध व स्पष्ट हिंदी भाषा पढ़ने व लिखने की क्षमता का विकास करना।
  • छात्रों के शब्द भण्डार में वृद्धि करना।
  • छात्रों में सृजनात्मक शक्ति का विकास करना।
  • छात्रों में स्पष्ट अभिव्यक्ति की क्षमता रृका विकास करना।
(ख) विशिष्ट उद्देश्य (Specific Objective)-
विशिष्ट उद्देश्य के अन्तर्गत पढ़ाये जाने वाले प्रकरण के उद्देश्य निर्धारित किये जाते है। विशिष्ट उद्देश्य से पाठ की समाप्ति पर किन शिक्षण सम्बन्धी परिणामों की प्राप्ति होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए। विशिष्ट उद्देश्य वे कथन है जो सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के उपरान्त छात्रों के ज्ञान, दृष्टिकोण और कौशल के सन्दर्भ में शिक्षण सम्बन्धी परिणामों (Learning Outcomes) का वर्णन करते है। जैसे- विमल बिंदु की विशाल किरणों के लिए बनी पाठ योजना के उद्देश्य-
  • छात्र विमल बिंदु की विशाल किरणों के महत्व को जान सकेंगे।
  • छात्र विमल बिंदु की विशाल किरणों से संबंधित चार्ट माॅडल बना सकेंगे।
  • छात्र विमल बिंदु की विशाल किरणों से जुड़े महतवपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कर सकेंगे।
(ग) सहायक सामग्री-
पाठयोजना में आवश्यक शिक्षण सामाग्री (Required Teaching Material) का उल्लेख किया जाता है, जिसके अन्तर्गत कक्षा-शिक्षण में प्रयोग किये जाने वाली सामग्रियों व टी०एल०एम० का उल्लेख किया जाता है।
  • चार्ट, माॅडल, श्यामपट्ट आदि।
(घ) पूर्व ज्ञान(Previous Knowledge)-
शिक्षण प्रारंभ करने से पूर्व बच्चों के पूर्व ज्ञान के आकलन हेतु गतिविधियों का उल्लेख किया जाए इसके अन्तर्गत यह स्पष्ट रूप से अंकित किया जाना चाहिये कि पढ़ाये जाने वाले प्रकरण से सम्बन्धित पूर्व कक्षा/वादन में क्या पढ़ाया गया था या सिखाया गया था। पूर्व ज्ञान परिवेश से जुड़ा भी हो सकता है। जैसे-
  • छात्र मल बिंदु की विशाल किरणों से संबंधितत सामान्य जानकारी रखते हैं।
(ड़) प्रस्तावना (Introduction)- प्रस्तावना पढ़ाये जाने वाले विषय तक पहुँचने का माध्यम होती है। प्रस्तावना कई प्रकार से हो सकती है जैसे कि प्रश्न द्वारा या अन्य प्रकार से। प्रस्तावना प्रश्नों का डिजाइन इस प्रकार से तैयार किया जाना चाहिए कि उन प्रश्नों से बच्चों की पढ़ाये जाने वाले पाठ या विषयवस्तु के प्रति सोच की जानकारी मिले। प्रस्तावना प्रश्नों में पूर्व ज्ञान व पढ़ायी जाने वाली विषयवस्तु से समन्वय होना चाहिये। जैसे-
छात्राध्यापक क्रियाविद्यार्थी क्रिया
रात के समय आकाश में क्या दिखायी देते हैं?चन्द्रमा, तारें
चन्द्रमा के पर्यायवाची शब्द कौन-कौन से हैं?सुधाकर, मयंक, सोम, राकेश, इंदु
इंदु पृथ्वी पर क्या फैलाता है?रोशनी, प्रकाश की किरणें
'विमल इंदु की विशाल किरणें' कविता के बारे में बताओ।समस्यात्मक प्रश्न
(च) उद्देश्य कथन (Statement of Aim)- प्रस्तावना के बाद शिक्षक बच्चों के समक्ष पढ़ाये जाने वाले पाठ/विषयवस्तु को स्पष्ट करेंगे इसका उल्लेख पाठयोजना में होना चाहिए। जैसे-
  • विद्यार्थियों आज हम 'विमल इंदु की विशाल किरणें' कविता के बारे में अध्ययन करेंगे।
(छ) शिक्षण विधि (Teaching Method and Transaction)- इसके अन्तर्गत पाठ के विकास एवं प्रस्तुतीकरण की विधियों का उल्लेख होगा तथा शिक्षक द्वारा सम्बन्धित प्रकरण का शिक्षण किया जाएगा। अध्याय /प्रकरण का विस्तार प्रश्नोत्तर विधि / व्याख्यान/ गतिविधि/ समूह कार्य टी०एल०एम०/आई0सी0टी0 के प्रयोग तथा अन्य शिक्षण विधियों के माध्यम से किया जा सकता है। यहाँ पर शिक्षक एक या एक अधिक शिक्षण विधियों का प्रयोग कर सकता हैं।
(ज) आकलन हेतु बोध प्रश्न ज्ञान, समझ व कौशल का आकलन (Test of Comprehen- sion) - इसके अंतर्गत पढ़ाये गये विषय में विकसित हुई समझ के आंकलन हेतु प्रयोग की जाने वाली परम्परागत विधियों तथा नवीन विविधों /प्रविधियों का उल्लेख होना चाहिए।
(झ) श्यामपट्ट सारांश (Black-board Summary)- पढ़ायी गयी विषयवस्तु का संक्षेप में यथा आवश्यकता श्यामपट्ट पर अंकन किया जाए। फ्लो डायग्राम चित्र आदि का प्रयोग संक्षिप्तीकरणमें किया जा सकता है अथवा इस हेतु पी0पी0टी0 का भी प्रयोग कर सकते है। यह सामग्रीपाठयोजना में प्रदर्शित होनी चाहिए।
(ञ) मूल्यांकन (Evaluation)- विशिष्ट उद्देश्य / शिक्षण सम्बन्धी परिणाम की सम्प्राप्ति के सापेक्ष ही प्रश्नों/गतिविधियों द्वारा बच्चों के ज्ञानात्मक, बोधात्मक, कियात्मक, मनोप्रेरणा पक्षों का मूल्यांकन करते हुए आकलन किया जाना चाहिए । मूल्यांकन से सम्बन्धित प्रश्न और गतिविधियों पाठयोजना में प्रदर्शित होनी चाहिए। प्रत्येक विशिष्ट उद्देश्य के सापेक्ष प्रश्न और गतिविधि निर्धारित होनी चाहिए. जिससे शिक्षक द्वारा यह आकलन किया जा सके कि उसके द्वारा निर्धारित किये गये विशिष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति हुई है अथवा नहीं।
(ट) गृह कार्य (Home Assignment)- गृहकार्य में ऐसी गतिविधियों का समावेश हो जिससे बच्चों के सृजनात्मकता, समस्या समाधान, तार्किक क्षमता, चिन्तन आदि का विकास हो सके तथा वह मूल्यांकन/मापन योग्य


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