1.

हिसाब लिखते समय और वित्तीय पत्रक तैयार करने के लिये उपयोग में लिये जानेवाले हिसाबी सिद्धांत अथवा ख्याल अथवा प्रणालिकाएँ अथवा नियमों या मान्यताओं की आवश्यकता समझाओ ।

Answer»

नामा लिखना मात्र व्यवसाय का उद्देश्य नहीं परंतु यह लिखे गये हिसाब सभी समझ सके और व्यवसाय से जुड़े सभी पक्षकार को उपयोगी सिद्ध हो सके इस प्रकार से लिख्ने हुए होने चाहिए । हिसाबों में एकरूपता बनाये रखने के लिये हिसाबी पत्रकों को तैयार करते समय हिसाबी सिद्धांत, प्रणालिकाएँ, मान्यताओं और ख्यालों का उपयोग किया जाता है । अगर ऐसा न किया जाये तो विविध पक्षकार दी गई जानकारी का अपने-अपने हिसाब से अर्थघटन कर अयोग्य निर्णय लेने की संभावनाएँ बढ़ जाती है । इसलिये नामा के द्वारा हिसाबी जानकारियाँ में समानता लाने के लिये और जानकारी देनेवाले और जानकारी प्राप्त करनेवाले दोनों एक ही दिशा में समझ सके इस उद्देश्य से हिसाबी ख्याल, सिद्धांत, प्रणालिकाएँ एवं मान्यताएँ आवश्यक है ।

निम्न बातें इन सभी जानकारियों को आसानी से स्पष्ट करती है :

  1. लिखे गये हिसाबी ख्याल तर्क पर आधारित होते है ।
  2. हिसाब लेखाकार की अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं की इस पर कोई असर नहीं होती ।
  3. इसके कारण हिसाब लिखनेवाले और पढ़नेवाले दोनों की समझ एकसमान रहती है ।
  4. इसके कारण हिसाबों की तुलना करना आसान रहता है ।
  5. यह हिसाब वास्तविकता से जुड़े होते है, जो व्यवसाय के लिये आधारशिला होते है ।
  6. ज्यादातर, लेखाकार इसका उपयोग करने से स्वीकृत हिसाबी सिद्धांत (GAAPS) के रूप में भी जाना जाता है ।
  7. यह सिद्धांत मार्गदर्शक अथवा आधार के रूप में स्वीकार किये जाते है ।


Discussion

No Comment Found