1.

हम सांस्कृतिक अस्मिता की बात कितनी ही करें; परंपराओं का अवमूल्यन हुआ है, आस्थाओं का क्षरण हुआ है । कड़वा सच तो यह है कि हम बौद्धिक दासता स्वीकार कर रहे हैं, पश्चिम के सांस्कृतिक उपनिवेश बन रहे हैं । हमारी नई संस्कृति अनुकरण की संस्कृति है । हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपनाते जा रहे हैं । प्रतिष्ठा की अंधी प्रतिस्पर्धा में जो अपना है उसे खोकर छद्म आधुनिकता की गिरफ्त में आते जा रहे हैं । संस्कृति की नियंत्रक शक्तियों के क्षीण हो जाने के कारण हम दिग्भ्रमित हो रहे हैं ।1. उपभोक्तावादी संस्कृति का समाज में क्या असर हुआ है ?2. पश्चिम के सांस्कृतिक उपनिवेश बनने का आशय स्पष्ट कीजिए ।3. नई संस्कृति का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ?4. ‘सांस्कृतिक’, ‘आधुनिकता’ शब्द में से प्रत्यय अलग कीजिए ।

Answer»

1. उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारी प्राचीन परंपराओं को जड़ से हिला दिया है, इन परंपराओं का अवमूल्यन हुआ है, हमारी आस्थाओं का क्षरण हुआ है ।

2. सांस्कृतिक उपनिवेश बनने का आशय है – अपनी संस्कृति और जीवन शैली को भूलकर किसी अन्य देश की संस्कृति को लंबे समय तक अपनाए रखना सांस्कृतिक उपनिवेश कहलाता है ।

3. नई संस्कृति के अंधानुकरण में हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपनाते जा रहे हैं । जो अपना है उसे खोकर छद्म आधुनिकता की गिरफ्त में आते जा रहे हैं । अपनी संस्कृति की नियंत्रण शक्तियों के क्षीण होने पर हम दिग्भ्रमित होते जा रहे हैं ।

4. सांस्कृतिक → इक प्रत्यय
आधुनिकता → ता प्रत्यय ।



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