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हमारा हमारे प्रति क्या अधिकार है?

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हमारा हमारे प्रति यह अधिकार है कि यदि मैं हार जाऊँ, तो हार कर भागू नहीं। यदि मैं थक जाऊँ, तो थक कर बैठा न रहूँ। यदि मैं गिर जाऊँ, तो गिरा ही न रहूँ उठकर चलें भी। यदि मैं अपने जीवन में और भूल करूं, तो भूल और भ्रम में ही न फंसा रहूँ। शीघ्र ही सही रास्ता तलाश कर उस पर चलने लगूं। धरना, थकना, गिरना तथा भूल करना एक मनुष्य के नाते स्वाभाविक बातें हैं तथा ऐसा होना असंभव नहीं है।

हमारा यह अधिकार है कि हम अपनी कमियों को देखें और उनमें सुधार करें। हम कभी निराश न हों और अपना काम करते रहें। एक कामे रुकने पर नया काम आरम्भ करू, नया स्टार्ट करूं, क्योंकि रुक जाना ही मृत्यु है।



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