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होमरूल तथा माले मिण्टो सुधार पर टिप्पणी कीजिए।

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होमरूल आन्दोलन (1916 ई०)- स्वशासन प्राप्त करने का यह वैधानिक संगठन था। एनी बेसेण्ट ने 1 सितम्बर, 1916 में मद्रास (चेन्नई) में होमरूल लीग की स्थापना की। इसकी आठ स्थानों पर शाखाएँ खोली गई। मद्रास (चेन्नई) के चीफ जस्टिस सुब्रह्मण्यम् अय्यर का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा। वस्तुतः होमरूल आन्दोलन की शुरूआत ही लोकमान्य तिलक ने की थी। मार्च, 1916 में तिलक ने पूना में होमरूल लीग की स्थापना की। लीग का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत सभी वैधानिक तरीकों से स्वशासन प्राप्त करना और इस दिशा में जनमत तैयार करना था। तिलक ने अपने मराठा तथा केसरी व एनी बेसेण्ट ने अपने ‘कॉमन वील’ तथा ‘न्यू इण्डिया’ नामक समाचार-पत्रों के माध्यम से गृह-शासन की माँग का जोरदार प्रचार किया। शीघ्र ही यह आन्दोलन समस्त भारत में फैल गया। इसी आन्दोलन के दौरान तिलक ने ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया था। इंग्लैण्ड में भी होमरूल लीग की स्थापना हुई। मजदूर दल के नेता ‘होराल्ड लास्की’ ने इसे प्रोत्साहन दिया।
1917 ई० तक होमरूल आन्दोलन अपनी चरम सीमा तक पहुँच गया। सरकार ने तिलक और एनी बेसेण्ट के बढ़ते हुए प्रभाव को गम्भीरता से देखा एवं दमनकारी नीति अपनाई। एनी बेसेण्ट को गिरफ्तार कर लिया तथा तिलक पर भी दिल्ली और पंजाब में आने पर प्रतिबन्ध लगाए गए। एनी बेसेण्ट की गिरफ्तारी के विरोध में जगह-जगह सभाएँ हुईं। स्थान-स्थान पर प्रदर्शन किए गए। मजबूर होकर सरकार ने एनी बेसेण्ट को छोड़ दिया। इन्हीं दिनों 20 अगस्त, 1917 को भारत सचिव मॉण्टेग्यू की प्रसिद्ध घोषणा हुई, इस घोषणा के अनुसार भारत में धीरे-धीरे उत्तरदायी सरकार देने का प्रावधान रखा गया। इस घोषणा के बाद होमरूल आन्दोलन समाप्त हो गया। मार्ले-मिण्टो सुधार (1909 ई०)- उत्तर के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या-5 के उत्तर का अवलोकन कीजिए।



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